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RSS के स्मृति मंदिर पहुंचे दिग्गज कारोबारी राहुल बजाज, हेडगेवार और गोलवलकर को दी श्रद्धांजलि

बजाज के दौरे के वक्त आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और जनरल सेक्रेटरी भैयाजी जोशी शहर में नहीं थे। हालांकि, बजाज महल इलाके स्थित आरएसएस मुख्यालय नहीं गए, जहां आम तौर पर भागवत और जोशी रहते हैं।

Author नागपुर | Updated: September 18, 2019 8:36 AM
बजाज ग्रुप के चेयरमैन राहुल बजाज ने आरएसएस के स्मृति मंदिर का दौरा किया। (PTI PHOTO)

बड़े उद्योगपति और बजाज ग्रुप के चेयरमैन राहुल बजाज रविवार को नागपुर स्थित आरएसएस के स्मृति मंदिर पहुंचे। बजाज ने यहां आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार और उनके बाद संघ की कमान संभालने वाले एमएस गोलवलकर को श्रद्धांजलि दी। बजाज ने यहां घंटे भर से ज्यादा वक्त बिताया और आरएसएस के स्थानीय पदाधिकारियों से बातचीत की।

नागपुर महानगर आरएसएस प्रमुख राजेश लोया ने बताया, ‘मैं उनसे जनवरी में गांधीवादी नेता जस्टिस चंद्रशेखर धर्माधिकारी के अंतिम संस्कार के दौरान मिला था। तब मैंने उनसे दरख्वास्त की थी कि वह स्मृति मंदिर आएं। उस वक्त वह जल्दी में थे लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया था कि वह भविष्य में जरूर आएंगे। उन्होंने बीते हफ्ते मुझे कॉल करके सूचित किया कि वह रविवार को आएंगे। वह आए और उन्होंने हेडगेवार और गोलवलकर के स्मारकों पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक हमसे बातें की।’

बजाज के दौरे के वक्त आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और जनरल सेक्रेटरी भैयाजी जोशी शहर में नहीं थे। हालांकि, बजाज महल इलाके स्थित आरएसएस मुख्यालय नहीं गए, जहां आम तौर पर भागवत और जोशी रहते हैं। दरअसल, बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के उद्घाटन के लिए वर्धा जाते वक्त राहुल बजाज आरएसएस के स्मृति मंदिर पहुंचे थे। इस संस्थान की शुरुआत शिक्षा मंडल की ओर से की गई है, जो बजाज की अगुआई में चलने वाला एक शैक्षिक संगठन है।

बता दें कि बजाज 2006 में बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी के समर्थन से महाराष्ट्र से राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं। वहीं, आरएसएस वक्त-वक्त पर अलग अलग विचाधाराओं के लोगों को अपने कार्यक्रमों में बुलाता रहा है। 2017 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी आरएसएस के कार्यक्रम में जा चुके हैं। उनके दौरे को लेकर अच्छा खासा राजनीतिक विवाद हुआ था। वहीं, रतन टाटा भी दो बार दिसंबर 2016 और इस साल अप्रैल में आरएसएस मुख्यालय जा चुके हैं। इन दोनों ही मौकों पर उन्होंने भागवत से मुलाकात की थी।

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