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PAK की बानो बेगम को जमानत नहीं, कोर्ट ने कहा- पाक की नागरिक होने के बाद भी भारत में कैसे लड़ा चुनाव

कोर्ट का कहना था कि वोटर आईडी, राशन कार्ड और आधार कार्ड बानो बेगम ने कैसे जुटाए, इसकी विवेचना अभी चल रही है। लिहाजा अभी उसे जमानत पर छोड़ना ठीक नहीं है।

BANO BEGAMपाकिस्तान मूल की महिला बानो बेगम (फोटोः एजेंसी)

जालसाजी करके यूपी के गांव की प्रधान बनने वाली PAK की महिला बानो बेगम को जमानत नहीं मिल सकी। कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि महिला को पता था कि वह पाक की नागरिक है, फिर भी उसने भारत में चुनाव कैसे लड़ा। कोर्ट का कहना था कि वोटर आईडी, राशन कार्ड और आधार कार्ड बानो बेगम ने कैसे जुटाए, इसकी विवेचना अभी चल रही है। लिहाजा अभी उसे जमानत पर छोड़ना ठीक नहीं है।

एटा जिले की ग्राम पंचायत गुदाऊ की पूर्व कार्यवाहक प्रधान बानो बेगम फिलहाल जेल की सींखचों के पीछे है। बानो बेगम पर गलत दस्तावेज लगाकर पंचायत चुनाव लड़ने का आरोप है। बानो ने 2015 का पंचायती चुनाव अपनी नागरिकता के तथ्यों को छिपाकर चुनाव लड़ा और ग्राम पंचायत की सदस्य बन बैठी। दिसंबर 2020 में ग्राम प्रधान का पद रिक्त हुआ तो वह कार्यवाहक ग्राम प्रधान बन गई। लेकिन उस दौरान भी बानो ने अपने तथ्यों को छिपाया। पुलिस का कहना है कि बानो बेगम के पास वोटर आईडी, राशन कार्ड और आधार कार्ड भी है। फिलहाल जिलाधिकारी ने एक टीम बनाई है जो यह पता लगा रही है कि इतने अहम दस्तावेज महिला ने किस जरिए से जुटाए थे।

पुलिस के अनुसार की बानो बेगम मूलरूप से पाकिस्तान की रहने वाली है। बानो का जन्म 1968 में आगरा के अछनेरा में हुआ था। 1971 में उसका परिवार पाकिस्तान चला गया। 1979 में परिवार दोबारा भारत आया। 1980 में बानो का निकाह जलेसर निवासी अख्तर अली के साथ कर दिया गया। उसके बाद उसके पिता वापस पाकिस्तान चले गए। पुलिस का कहना है कि बानो बेगम को हर तीन साल के बाद वीजा का एक्सटेंशन मिलता रहा है। 

गौरतलब है कि बानो बेगम की जालसाजी का खुलासा तब हुआ जब आमिर हसन के साथ उनका 120 गज के प्लॉट को लेकर विवाद हुआ। यह मामला कोर्ट में भी चल रहा है। अख्तर ही वह शख्श है जिसके बानो की नागरिकता को लेकर पुलिस को सुराग दिया। उसके परिवार का कहना है कि 5 मार्च को कोर्ट ने बानो की जमानत खारिज कर दी थी। अब वो इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल करने जा रहे हैं। बानो के दो बच्चे बेटा नईमुद्दीन और बेटी आसमा परवीन भारत में ही हैं। बेटी मथुरा में अपने परिवार के साथ है जबकि बेटा गुरुग्राम में नौकरी करता है।

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