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मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद खुद को बैरक में कैद कर लिया मुख्तार अंसारी ने, जानिए

मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद से बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी न तो ठीक से खाना खा रहा है और न हीं अपने बैरक से बाहर निकल रहा है। यूं कहें तो उसने खुद को बैरक में कैद कर लिया है।

File photo of mukhtar ansari

उत्तर प्रदेश के बागपत जेल में बंद पूर्वांचल के कुख्यात मुन्ना बजरंगी की हत्या से बसपा के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी सदमे में है। वह दो दिनों से न तो सही से खाना खा रहे हैं और न हीं किसी से मुलाकात कर रहे हैं। खुद को बैरक में बंद कर लिया है। हालांकि, जेल प्रशासन  उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रख रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांदा जेल अधीक्षक वीएस त्रिपाठी ने बताया कि अंसारी जेल की बैरक संख्या 15 और 16 में बंद हैं। अपने सहयोगी मुन्ना बजरंगी की हत्या की खबर सुनने के बाद से वे दो दिनों से अपने बैरक से बाहर नहीं निकले हैं और न हीं किसी से मुलाकात की इच्छा जताई है। वे ठीक से खाना भी नहीं खा रहे हैं। हालांकि, जेल प्रशासन भी सीसीटीवी के जरिए उनके सुरक्षा का पूरा ध्यान रख रहा है। जेल के अंदर और बार की सुरक्षा चाक-चौबंद की गई है। पुलिस के अलावा पीएसी के जवान भी तैनात किए गए हैं। अधिकारी खुद सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं। सघन छापेमारी भी की जा रही है। मुलाकातियों पर भी विशेष नजर है। बता दें कि मुख्तार अंसारी 30 मार्च 2017 से जेल में बंद हैं। जेल में रहने के दौरान उन्हें एक बार दिल का दौरा भी पड़ चुका है।

मुख्तार अंसारी का खास था मुन्ना बजरंगी: जौनपुर के रहने वाले मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। उसने 17 साल की उम्र में पहली बार अपराध किया था। बाद में उसने जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह के इशारे पर जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या कर की। 80 और 90 के उसने अपराध की दुनिया में अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया था। इस दौरान उसके दोस्त अनिल संह और कलाम ने उसकी दोस्ती मुख्तार अंसारी से करवाई और वह उसके गैंग में शामिल हो गया। मुन्ना बजरंगी की सहायता से ही 1996 में सपा से विधायक बनने के बाद अंसारी ने सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर अपनी पकड़ मजबूत की थी। 29 नवंबर 2005 को मुख्तार अंसारी के कहने पर ही मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय और उनके छह साथियों की  गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसी तरह मुख्तार के कहने पर बजरंगी ने कई हत्याएं की। कहा जाता है कि एक बार बजरंगी को गोली लगी थी तो उस वक्त मुख्तार ने ही उसकी जान बचाई थी। इसके बाद दोनों की दोस्ती और मजबूत हो गई थी।

जेल के अंदर की हो गई मुन्ना की हत्या: अपराधियों के लिए सबसे सुरक्षित माने वाले जगहों में से एक जेल में ही मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई। इसका आभास न तो मुन्ना को था और न हीं मुख्तार अंसारी को। बीते सोमवार को मुन्ना बजरंगी को बागपत जले के भीतर 10 गोली मारी गई थी। हत्या का आरोप जेल में बंद दूसरे कुख्यात सुनील राठी पर है। इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश देकर जेलर, डिप्टी जेलर समेत 4 जेलकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। मुन्ना बजरंगी की हत्या के साथी अपराध के एक अध्याय का अंत हो गया।

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