धीरेंद्र शास्त्री की संस्था बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham) को अब विदेश से दान प्राप्त करने की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम को यह मंजूरी भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के तहत दी है। इसका मतलब है कि अब धीरेंद्र शास्त्री की इस संस्था को विदेश में रहने वाले लोग भी कानूनी रूप से चंदा दे सकेंगे। अभी तक विदेश से चंदा लेने के लिए संस्था को विशेष अनुमति की जरूरत होती थी।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की देखरेख वाली बागेश्वर जन सेवा समिति, ग्राम गड़ा (छतरपुर) से काम करती है। यह संस्था धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्रों में सक्रिय है। अब विदेश से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल इन गतिविधियों को और विस्तार देने में किया जाएगा।

बता दें कि पिछले कुछ समय से बागेश्वर बाबा के नाम से मशहूर धीरेंद्र शास्त्री सुर्खियों में हैं। उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और उनके अनुयायी देश ही नहीं विदेशों में भी मौजूद हैं। ऐसे में यह मंजूरी उनके संगठन के लिए एक अहम मानी जा रही है।

एफसीआरए से जुड़े नियमों की बात करें तो FCRA के तहत जो भी संस्था विदेश से पैसे लेती है, उसे पूरा हिसाब-किताब रखना होता है। सरकार को यह बताना होता है कि पैसा कहां से आया और कहां खर्च हुआ। पैसे का यह लेनदेन बैंक खाते के जरिए होता है और नियमित तौर पर रिपोर्ट देनी होती है।

5 साल का रजिस्ट्रेशन

15 अप्रैल 2026 तक FCRA के तहत 14,538 गैर-सरकारी संगठन (NGOs) पांच साल के रजिस्ट्रेशन के साथ एक्टिव हैं। साल 2015 से अब तक 18,000 से ज्यादा लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं।

प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 (Foreign Contribution Regulation Amendment Bill 2026) जिसमें लाइसेंस रद्द होने पर एनजीओ की संपत्तियों को सरकारी नियंत्रण में लेने का प्रावधान था, इसे विरोध के बाद स्थगित कर दिया गया। कुछ संगठनों के पंजीकरण की अवधि को बढ़ाया भी गया है।

FCRA क्या है?

FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) एक भारतीय कानून है जो गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), संघों और कंपनियों द्वारा विदेशी चंदा लेने और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन से राष्ट्रीय सुरक्षा या हितों को नुकसान न पहुंचे। यह कानून गृह मंत्रालय (MHA) के तहत आता है।

कैसे मिलती है FCRA के तहत मंजूरी?

जो गैर-सरकारी संगठन (NGOs) विदेशी धन प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें निर्धारित प्रारूप में जरूरी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन करना होता है। एफसीआरए के तहत मंजूरी उन व्यक्तियों या संस्थाओं को दिया जाता है जिनके पास सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक, धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में स्पष्ट कार्यक्रम हों।

एनजीओ के आवेदन के बाद, गृह मंत्रालय इंटेलिजेंस ब्यूरो के माध्यम से आवेदक की पृष्ठभूमि की जांच करता है और उसी के आधार पर आवेदन पर फैसला लिया जाता है।

FCRA के तहत, आवेदक काल्पनिक या बेनामी नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, उस पर किसी भी तरह से प्रलोभन या बल के जरिए धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों में शामिल होने का आरोप ना हो और ना ही उसे इसके लिए दोषी ठहराया गया हो। आवेदक पर सांप्रदायिक तनाव या वैमनस्य फैलाने के आरोप में कोई कार्रवाई या सजा नहीं होनी चाहिए। उसे धन के दुरुपयोग या गबन का दोषी भी नहीं पाया गया होना चाहिए और ना ही वह राजद्रोह के प्रचार-प्रसार में शामिल हो या होने की संभावना हो।

गृह मंत्रालय को आवेदन प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर उसे स्वीकृत या अस्वीकृत करना होता है। यदि तय समय में आवेदन पर निर्णय नहीं लिया जाता तो मंत्रालय को संबंधित एनजीओ को देरी के कारणों की जानकारी देना जरूरी होता है।

FCRA से जुड़ी जरूरी बातें

अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन या पूर्व अनुमति अनिवार्य है।

संशोधन (2022/2026): सरकार ने FCRA नियमों को कड़ा किया है जिसमें विदेशी फंडिंग के उपयोग पर केंद्रीकृत नियंत्रण (Centralised Control) और संपत्तियों की घोषणा अनिवार्य की गई है।

नियमों में बदलाव (2022): 2011 के नियमों में 7 बदलाव कर इसे और कड़ा किया गया जिसमें निजी तौर पर विदेशी चंदा प्राप्त करने पर 1 लाख रुपये की सीमा को संशोधित कर 10 लाख रुपये करने जैसे बदलाव शामिल थे।

पुस्तक समीक्षा: संघर्ष, चमत्कार और अल्हड़पन: कुछ ऐसी है धीरेंद्र शास्त्री के जिंदगी की कहानी

वरिष्ठ पत्रकार सचिन चौधरी ने ‘बागेश्वर धाम सरकार पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अद्भुत यात्रा’ नामक जीवनी लिखी है। इस किताब में लेखक ने धीरेंद्र शास्त्री के बचपन से लेकर जीवन की कई चमत्कारिक घटनाओं का उल्लेख किया है। कैसे एक छोटा सा बालक आज दुनिया के लाखों युवाओं की धड़कन बन गया। पढ़ें पूरी समीक्षा…