चमोली प्रशासन ने बद्रीनाथ में हुए देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव को लेकर सेना से जवाब मांगा था। लेकिन अभी तक सेना को कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। द इंडियन एक्सप्रेस को यह जानकारी मिली है।
चमोली प्रशासन ने संगीत और डांस कार्यक्रमों को लेकर हुई आलोचना के बाद इस आयोजन से खुद को अलग बताया था। हालांकि प्रशासन के दस्तावेजों से पता चलता है कि कार्यक्रम के आयोजन और कॉर्डिनेशन की जिम्मेदारी उसी की थी। भारतीय सेना के सूत्रों ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बद्रीनाथ मंदिर परिसर में यह कार्यक्रम सभी संबंधित पक्षों की जानकारी में आयोजित किया गया था।
जिलाधिकारी की ओर से भेजे गए पत्र पर सेना की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर एक अधिकारी ने कहा, ”अभी तक हमें कोई पत्र या संदेश नहीं मिला है।”
बद्रीनाथ में हुआ डीजे म्यूज़िक कॉन्सर्ट
आपको बता दें कि देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 19 और 20 सितंबर को बद्रीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में दो दिन आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम सेना के ऑपरेशन सद्भावना के तहत जिला प्रशासन और उत्तराखंड पर्यटन विभाग के सहयोग से हुआ था। जिला प्रशासन के दस्तावेजों के मुताबिक, एक वरिष्ठ अधिकारी को कार्यक्रम की जिम्मेदारी दी गई थी।
8 सितंबर के आदेश में चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा था कि यह महोत्सव 19 और 20 सितंबर को होना है। उन्होंने चमोली के मुख्य विकास अधिकारी को कार्यक्रम का नोडल अधिकारी बनाया था।
आदेश में कहा गया था कि बद्रीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में होने वाले देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2026 को सफल बनाने के लिए जरूरी सभी इंतजाम किए जाएं। नोडल अधिकारी को भी कार्यक्रम की तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
जिलाधिकारी ने जारी किया पत्र
9 सितंबर को जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से जारी एक पत्र में भी 11 अगस्त को जोशीमठ के गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर की ओर से भेजे गए पत्र का जिक्र किया गया था। इसमें महोत्सव की तैयारियों की बात कही गई थी।
पत्र के मुताबिक, 10 सितंबर को सुबह 11:30 बजे चमोली के मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई थी। इसमें कार्यक्रम की तैयारियों पर चर्चा होनी थी और संबंधित अधिकारियों को बैठक में शामिल होने के लिए कहा गया था। इसी दिन जारी दूसरे पत्र में भी सेना के पत्र का जिक्र था। इसमें पुलिस, स्वास्थ्य, पर्यटन, परिवहन, आपूर्ति, खेल और दूसरे विभागों के अधिकारियों के नाम शामिल थे।
ये दस्तावेज उस पत्र के बाद सामने आए हैं जो जिलाधिकारी ने बाद में गढ़वाल राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल शांतनु को भेजा था। इसमें महोत्सव को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। जिलाधिकारी ने पत्र में कहा कि उन्हें अलग-अलग पत्रों और सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि बद्रीनाथ धाम में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
सेना की तरफ से नहींं आया जवाब
पत्र में कर्नल शांतनु से पूछा गया कि क्या बद्रीनाथ धाम में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अनुमति ली गई थी। अगर अनुमति ली गई थी तो किस अधिकारी या विभाग से ली गई थी, यह भी बताने को कहा गया। जिलाधिकारी ने कार्यक्रम में तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल की वजह भी पूछी। कर्नल शांतनु ने टिप्पणी के लिए भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।
जिलाधिकारी के पत्र में कहा गया कि बद्रीनाथ एक ‘पवित्र धार्मिक स्थल’ है। पत्र के मुताबिक, तेज आवाज में साउंड सिस्टम का इस्तेमाल मंदिर की पवित्रता के खिलाफ था और इससे पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता था।
पत्र में यह भी कहा गया कि भविष्य में बद्रीनाथ धाम में ऐसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए। जिलाधिकारी से इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
सोशल मीडिया पर कार्यक्रम के वीडियो सामने आने के बाद इस महोत्सव को लेकर सवाल उठे। इनमें उत्तराखंड की गायिका प्रियंका मेहर का कार्यक्रम भी शामिल था। उनके संगीत और डांस के साथ महोत्सव के पहले दिन का समापन हुआ था।
पूर्व बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी समेत कुछ लोगों ने इस कार्यक्रम पर आपत्ति जताई थी।
मुरली मनोहर जोशी ने जताई थी नाराजगी
बदरीनाथ धाम में हाल में सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान हुए शोर-शराबे वाले संगीत और नाच-गाने के कार्यक्रम का भारी विरोध शुरू हो गया है। इसके बाद चमोली जिला प्रशासन ने भारतीय सेना की स्थानीय बटालियन गढ़वाल स्काउट्स को कारण बताओ नोटिस भेजा है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने ऐसे कार्यक्रमों को सांस्कृतिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया था। पढ़ें पूरी खबर…
