मंत्री पद छूटने पर बाबुल सुप्रियो का ‘दर्द’, पार्टी के ही नेता दिलीप घोष ने बताया गलत

पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने गुरुवार को पार्टी नेता बाबुल सुप्रियो पर पलटवार किया।

Union minister resuffal
भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने गुरुवार को पार्टी नेता बाबुल सुप्रियो पर पलटवार किया। दरअसल, हाल ही में केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने इस्तीफा दिया है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, घोष ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि बुधवार को इस्तीफा देने वाले 12 मंत्रियों में से सिर्फ उन्होंने (सुप्रियो) ने ऐसी टिप्पणी की थी जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व के फैसले से उनकी नाराजगी का इशारा है।

गौरतलब है कि बाबुल सुप्रियो ने बुधवार को अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से एक पोस्ट में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल फेरबदल से पहले उन्हें केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री के पद से “इस्तीफा देने के लिए कहा गया”।सुप्रियो ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘हां, जब धुआं होता है तो कहीं आग तो जरूर होती है।’

बाबुल सुप्रियो ने पोस्ट में लिखा, ‘हां, जब धुआं होता है तो कहीं आग जरूर लगती है मीडिया में मेरे दोस्तों के फोन कॉल नहीं ले पा रहा हूं जो मेरी परवाह करते हैं इसलिए मैं इसे खुद बताता हूं .. हां, मैंने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया हैलेकिन इस्तीफा देने के लिए कहा गया इसे इस तरह रखने का सही तरीका नहीं हो सकता है। मैं माननीय प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे अपने मंत्रिपरिषद के सदस्य के रूप में अपने देश की सेवा करने का मौका दिया।’

अपने पहले के बयान में, दिलीप घोष ने कहा, ” उनका (सुप्रियो का) इस्तीफा मांगा गया ताकि कोई और जिम्मेदारी ले सके। इसी तरह एक पार्टी काम करती है; आपको नियत प्रक्रिया में विश्वास रखने की आवश्यकता है। अगर उन्हें निकाल दिया जाता तो क्या इससे चीजें बेहतर होतीं?”

घोष ने कहा कि इस्तीफा देने वाले 12 मंत्रियों में से किसी ने भी पार्टी के बारे में ऐसी टिप्पणी नहीं की। मालूम हो कि सुप्रियो हाल ही में कोलकाता की टॉलीगंज विधानसभा सीट से तृणमूल के अरूप विश्वास के खिलाफ राज्य विधानसभा चुनाव में हार गए थे, जो इस सीट के मौजूदा विधायक थे।

तब से, गायक से राजनेता बने केंद्रीय नेतृत्व से गायब पाए गए और उनकी राजनीतिक उपस्थिति राज्य में टीएमसी नेतृत्व की आलोचना में ही सीमित दिखाई दी। हालांकि, उनके इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले, बाबुल सुप्रियो एक कार्यक्रम में मौजूद थे।

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