बाबरी केस का फैसला न्याय का मजाक बनाने जैसा, CJI ने बताया था कानून का गंभीर उल्लंघन: येचुरी

बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में बुधवार को बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले को लेकर सीपीआई (एम) के नेता सीताराम येचुरी ने निशाना साधा है।

सीताराम येचुरी ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आरोपियों के बरी होने पर निशाना साधा है। (फाइल फोटो)

सीबीआई की विशेष अदालत ने छह दिसम्बर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में बुधवार को बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले को लेकर सीपीआई (एम) के नेता सीताराम येचुरी ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न्याय का मजाक बनाने जैसा है।

येचुरी ने ट्वीट करते हुए लिखा है, यह पूरी तरह से न्याय का मजाक बनाने जैसा है। बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आपराधिक साजिश  के आरोपियों को बरी कर दिया गया। क्या मस्जिद अपने आप ढह गई थी? तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली संवैधानिक पीठ ने इस मामले को कानून का उल्लंघन बताया था। और अब ऐसा फैसला आया है। शर्म आनी चाहिए।

वहीं,  एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कोर्ट के इस फैसले पर अपने ट्वीट में लिखा है- वही कातिल, वही मुनसिफ, अदालत उसकी वो शहीद, बहुत से फैसलों में अब तरफदारी भी होती है।

उधर, देश में मुसलमानों के प्रमुख संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में विशेष सीबीआई अदालत के बुधवार के फैसले पर टिप्पणी से इनकार करते हुए कहा कि अब मुस्लिम संगठन मिल—बैठकर तय करेंगे कि इसके खिलाफ आगे अपील करनी है या नहीं।

बता दें कि विशेष अदालत के न्यायाधीश एस.के. यादव ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी। यह एक आकस्मिक घटना थी। उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिले, बल्कि आरोपियों ने उन्मादी भीड़ को रोकने की कोशिश की थी।

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