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बाबरी मस्जिद विध्‍वंस मामला: आडवाणी, जोशी, उमा को मिली बड़ी राहत

उच्चतम न्यायालय के 19 अप्रैल के निर्देश पर सीबीआई की विशेष अदालत बाबरी ढांचा ढहाये जाने के मामले की सुनवाई दैनिक आधार पर कर रही है ताकि मुकदमे की सुनवाई दो साल के भीतर खत्म की जा सके।

Author June 7, 2017 9:19 PM
Ayodhya dispute, Ayodhya Ram Temple, Ayodhya babri Mosque, Babri Mosque demolish, ayodhya babri masjid, Ayodhya Ram Mandirकारसेवकों द्वारा क्षतिग्रस्त आयोध्या की बाबरी मस्जिद। (File Photo)

विशेष अदालत ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती को बड़ी राहत देते हुए अयोध्या मामले में सुनवाई के लिए रोजाना व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी है। रायबरेली में निचली अदालत की सुनवाई के दौरान भी तीनों नेताओं को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी गयी थी। मामले में 34 आरोपी हैं। सीबीआई की विशेष अदालत उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार रोजाना सुनवाई कर रही है।

आडवाणी, जोशी और उमा को व्यक्तिगत रूप से पेश होने की छूट अलग अलग वजहों से दी गयी है। अदालत ने हालांकि कहा कि निर्देश होने पर तीनों को अदालत में आकर पेश होना पडे़गा। भाजपा नेताओं के वकील ने व्यक्तिगत रूप से पेश होने की छूट दिये जाने के पीछे आडवाणी और जोशी की वृद्धावस्था तथा केंद्रीय मंत्री उमा भारती की व्यापक यात्राओं का हवाला दिया गया। अदालत ने 30 मई को आडवाणी, जोशी और उमा के अलावा नौ अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश का आरोप तय किया था। बरी किये जाने की उनकी अर्जी खारिज कर दी गयी थी।

उच्चतम न्यायालय के 19 अप्रैल के निर्देश पर सीबीआई की विशेष अदालत बाबरी ढांचा ढहाये जाने के मामले की सुनवाई दैनिक आधार पर कर रही है ताकि मुकदमे की सुनवाई दो साल के भीतर खत्म की जा सके। मामले के अन्य आरोपियों में भाजपा नेता विनय कटियार, साध्वी रितंभरा, विष्णु हरि डालमिया, महंत नृत्य गोपाल दास, महंत धर्मदास, राम विलास वेदांती, चंपत राय बंसल, बैकुंठ लाल शर्मा और शिवसेना नेता सतीश प्रधान शामिल हैं।

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 21 मई 2010 को इन नेताओं को बाबरी मस्जिद विध्वंस में आपराधिक साजिश रचने के आरोप से बरी कर दिया था। सीबीआई और हाजी महबूब ने सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती दी थी। इससे पहले 6 मार्च की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि इस केस के बारे में कुछ अजीब है और आडवाणी और अन्य लोगों के खिलाफ सीबीआई का आदेश सही नहीं था। कोर्ट ने आडवाणी, जोशी, उमा भारती और अन्य से आपराधिक साजिश के आरोप हटाने के आदेश के रिव्यू का विकल्प अपने पास रखा था।

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