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बाबरी विध्‍वंस केस में सभी आरोपी बरी, कोर्ट ने कहा-अराजक तत्‍वों ने गिराया था ढांचा, विहिप का हाथ नहीं

कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ ढांचा गिराने के पर्याप्त सबूत नहीं है। यही नहीं कोर्ट ने कहा कि बाबरी ढांचे को अराजक तत्वों ने गिराया था और इसमें विश्व हिंदू परिषद का हाथ नहीं है।

babri demolition caseमुरली मनोहर जोशी, लालकृष्ण आडवाणी और उमा भारती

अयोध्या की बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में विशेष सीबीआई अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ ढांचा गिराने के पर्याप्त सबूत नहीं है। यही नहीं कोर्ट ने कहा कि बाबरी ढांचे को अराजक तत्वों ने गिराया था और इसमें विश्व हिंदू परिषद का हाथ नहीं है। बता दें कि कोर्ट ने 30 सितंबर को फैसले में कहा कि पेश किए गए साक्ष्‍यों के आधार पर बाबरी विध्‍वंस में बीजेपी, आरएसएस, विहिप नेताओं की सहभागिता और विध्‍वंस के पूर्वनियोजित होने की बात साबित नहीं की जा सकती। यह काम असामाजिक तत्‍वों ने किया।

कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सबूतों के अभाव के चलते आरोपियों को मस्जिद के विध्वंस का दोषी नहीं माना जा सकता। फैसले के वक्त मामले के 32 आरोपियों में से 26 लोग मौजूद थे। इसके अलावा लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती और मुरली मनोहर जोशी जैसे नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जुड़े थे। फैसला आते ही केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने आडवाणी से मुलाकात की।

विनय कटियार समेत 26 नेता थे कोर्ट में मौजूद: फैसले के समय बजरंगी कहे जाने वाले विनय कटियार, धर्मदास, रामविलास वेदांती, लल्लू सिंह, चंपत राय और पवन पांडे जैसे बीजेपी और वीएचपी के नेता अदालत में मौजूद थे। इसके अलावा सतीश प्रधान और उमा भारती अस्पताल में भर्ती होने के चलते नहीं पहुंचे थे। वहीं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और नृत्य गोपाल दास को कोर्ट ने 80 साल से ज्यादा उम्र होने के चलते उपस्थिति से छूट दी थी।

फैसला आते ही सुशील मोदी का जय श्री राम: आडवाणी समेत दिग्गज नेताओं को बरी किए जाने का फैसला आते ही बीजेपी कैंप में उत्साह देखने को मिला। बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने फैसला ट्वीट कर स्वागत किया। सुशील मोदी ने लिखा, ‘जय श्री राम। आडवाणी जी सहित सभी अभियुक्त दोष मुक्त।बाबरी ढाँचा गिराने में कोई पूर्व नियोजित षड्यंत्र नहीं था।’

1993 में हुआ था कोर्ट का गठन: बता दें कि बाबरी मस्जिद के गिरने के 7 दिन बाद ही केस सीबीआई को सौंप दिया गया था। इस मामले की अलग-अलग जिलों में सुनवाई हुई, जिसके बाद इलाहबाद हाईकोर्ट ने 1993 में सुनवाई के लिए लखनऊ में विशेष अदालत का गठन किया था। तब सीबीआई ने अपनी संयुक्त चार्जशीट फइल की। इस चार्जशीट में ही बाल ठाकरे, नृत्य गोपाल दास, कल्याण सिंह, चम्पत राय जैसे 49 नाम जोड़े गए। इनमें से 17 लोगों की मौत हो गई है, जिसके चलते 32 आरोपी ही बचे थे।

बाल ठाकरे समेत 17 आरोपियों का हो चुका है निधन: बाबरी केस के जिन 17 आरोपियों का निधन हो चुका है, उनमें शिवसेना के संस्थापक बालठाकरे, विहिप के दिग्गज नेता रहे अशोक सिंघल शामिल हैं। इसके अलावा गिरिराज किशोर, विष्णु हरि डालमिया, मोरेश्वर सावें, महंत अवैद्यनाथ, महामंडलेश्वर जगदीश मुनि महाराज, बैकुंठ लाल शर्मा, परमहंस रामचंद्र दास, डॉ. सतीश नागर तत्कालीन एसएसपी डीबी राय, रमेश प्रताप सिंह, महात्यागी हरगोविंद सिंह, लक्ष्मी नारायण दास, राम नारायण दास और विनोद कुमार बंसल भी अब इस दुनिया में नहीं हैं।

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