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बाबरी विध्वंस मामला: CBI की SC से अपील, आडवाणी समेत एक दर्जन नेताओं पर लगे आरोपों को फिर से पुनर्जीवित करो

बाबरी विध्वंस मामले में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और बाकी लोगों के खिलाफ आपराधिक षड़यंत्र के आरोप के मामले को फिर से देखा जाना चाहिए। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (CBI) ने यह बात सुप्रीम कोर्ट में कही।

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी।

उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार (6 अप्रैल) को उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा जिसमें बाबरी मस्जिद ढहाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित वरिष्ठ भाजपा नेताओं के खिलाफ साजिश के आरोप बहाल करने की मांग की गई है। शीर्ष अदालत इस बारे में भी फैसला करेगी कि वीवीआईपी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई रायबरेली की एक अदालत से लखनऊ स्थानान्तरित की जा सकती है या नहीं।

छह दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिराने से संबंधित दो तरह के मामले हैं। पहला अज्ञात ‘कारसेवकों’ से जुड़ा है जिसमें सुनवाई लखनऊ की एक अदालत में चल रही है जबकि दूसरी तरह के मामले रायबरेली की एक अदालत में वीवीआईपी से संबंधित हैं।

न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की पीठ ने यह भी संकेत दिये कि वे सुनवाई रायबरेली से लखनऊ की एक अदालत में स्थानान्तरित करके दोनों तरह के मामलों की संयुक्त सुनवाई करने का आदेश दे सकते हैं।

पीठ ने कहा कि चूंकि 25 साल गुजर चुके हैं, न्याय के हित में वह रोजाना समयबद्ध तरीके से सुनवाई का आदेश देने पर विचार करेगी ताकि इसे दो साल के भीतर पूरा करने का प्रयास हो।

क्या है मामला: बीजेपी नेता एल के आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत एक दर्जन नेता जिसमें विनय कटियार और यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह का नाम शामिल है उनपर बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लगे साजिश के आरोपों को रायबरेली की कोर्ट ने हटा दिया था। 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत का फैसला मान लिया था। उसके बाद सीबीआई ने कोर्ट के ऑर्डर के खिलाफ अपील की थी।

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