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मोदी जी की नीति किसान विरोधी नहीं हो सकती, मेरे पास तो एक इंच जमीन भी नहीं- बोले बाबा रामदेव

किसानों ने सरकार के साथ बातचीत से पहले एमएसपी को कानूनी गारंटी देने, खेत कानूनों को निरस्त करने, किसानों के खिलाफ सभी मामले रद्द करने और बिजली क्षेत्र में सब्सिडी में कटौती के लिए कोई अध्यादेश नहीं लाने की मांग रखी हैं।

Patanjali Coronil kitयोगगुरु बाबा रामदेव। (पीटीआई)

पतंजलि के संस्थापक और योग गुरु बाबा राम देव ने कहा है कि पीएम मोदी की नीति किसान विरोधी नहीं हो सकती है। टीवी चैनल न्यूज-24 के मंथन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि “मेरे पास तो एक इंच जमीन भी नहीं है। एक चवन्नी तक नहीं है। कोई बैंक बैलेंस या एकाउंट नहीं है। उनका एकाउंट केवल फेसबुक और ट्विटर आदि ही है। वह आत्मनिर्भर भारत देखना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा कि “मैं ट्रस्टीशिप के रूप में परमार्थ के लिए काम करता हूं।” बताया कि वह गरीबी के उपासक नहीं हैं। दुनिया में आज यदि किसी ने किसानों के लिए सबसे बड़ा सक्सेजफुली फूड पार्क बनाया है तो वह पतंजलि ने बनाया है। करीब 250 एकड़ भूमि में यह फूड पार्क स्थित है। बताया कि पतंजलि ने पांच लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराया है। 20 करोड़ लोगों तक रामदेव प्रत्यक्ष रूप से घरों तक पहुंचे हैं। स्वयं को एक फकीर बताते हुए उन्होंने दावा किया कि दस करोड़ लोगों को शिविर लगाकर नौकरियां दी हैं।

टीवी चैनल पर उन्होंने कहा कि आज किसानों के आंदोलन की बात हो रही है। हमने किसानों के लिए काम किया है। किसानों के फायदे के लिए काम किया है। फूड पार्क बनाकर लाखों किसानों को फायदा पहुंचाया है। पीएम मोदी की नीतियां किसान विरोधी नहीं हैं।

बाबा रामदेव ने कहा कि कि बहुत से लोग उनके वैचारिक विरोधी हैं। बहुत लोगों को उनके वस्त्र, कार्य और सोच से घृणा है। लेकिन उनको मानना पड़ता है कि हमने लाखों लोगों को नौकरियां दी हैं। कहा कि कॉरपोरेट की भाषा में कहें तो ‘वोकल फार लोकल’ के लिए और ‘लोकल फार ग्लोबल’ के लिए हमने काम किया है। कहा कि हमारा काम कस्टमर बेस आयुर्वेद का है। हमने नई जीवन पद्धति सिखाई है। कहा कि पतंजलि ने योग और आयुर्वेद से आत्मनिर्भर भारत बनाने की सबसे बड़ी प्रेरणा दी है।

इस बीच बातचीत से पहले किसानों ने सरकार के सामने चार शर्तें रखी हैं। कहा कि इनको पूरा करने पर ही बातचीत करेंगे। ये शर्तें हैं एमएसपी को कानूनी गारंटी दी जाए। खेत कानूनों को निरस्त किया जाए। किसानों के खिलाफ सभी मामले रद्द हों और बिजली क्षेत्र में सब्सिडी में कटौती के लिए कोई अध्यादेश नहीं लाया जाए।

केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर एक महीने से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे हैं और वे संबंधित कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इन किसानों में ज्यादातर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं।किसानों ने मांग पूरी न होने पर अगले कुछ दिनों में आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। सरकार और किसान संगठनों के बीच अब तक हुई पांच दौर की बातचीत बेनतीजा रही है।

प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने बुधवार को दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित वार्ता के संबंध में मंगलवार को केंद्र सरकार को पत्र लिखा और कहा कि चर्चा केवल तीन कानूनों को निरस्त करने के तौर-तरीकों एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वैध गारंटी देने पर ही होगी।

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