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खाने पीने की चीजों के बाद अब जींस भी बेचेंगे बाबा रामदेव

खाने पीने की चीजों के बाद अब रामदेव कपड़ा कारोबार में भी अपना कदम रखने जा रहे हैं, इसके लिए रामदेव परिधान नाम का एक कपड़ों का ब्रांड शुरु करने वाले हैं।

Author September 10, 2016 2:39 PM
रामदेव अपने ब्रांड ‘परिधान’ में जींस और फॉर्मल कपड़े भी बेचेंगे। देश में पतंजलि की कामयाबी के बाद अब रामदेव देश के बाहर भी अपने कारोबार का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।

योग के बाद कारोबार में अपनी मजबूत पकड़ बनाने वाले योग गुरु बाबा रामदेव अब एक नया धमाका करने जा रहे हैं। खाने पीने की चीजों के बाद अब रामदेव कपड़ा कारोबार में भी अपना कदम रखने जा रहे हैं, इसके लिए बाबा रामदेव परिधान नाम का कपड़ों का ब्रांड शुरु करने वाले हैं। रामदेव अपने ब्रांड ‘परिधान’ में जींस और फॉर्मल कपड़े भी बेचेंगे। देश में पतंजलि की कामयाबी के बाद अब रामदेव देश के बाहर भी अपने कारोबार का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।

बाबा रामदेव ने ‘द टेलीग्राफ’ को बताया कि उन्होंने अपने उन फॉलोअर्स के साथ इस पर विचार किया है जो उन्हें पतंजलि योग कपड़े लाने के लिए कह रहे थे। उसके बाद उन्होंने विचार किया कि क्यों नहीं सभी के कपड़ों के लिए ‘परिधान’ शुरु किया जाए। उन्होंने ये भी कहा कि अगर हम हमारे देश में आर्थिक आजादी लाने के लिए लड़ाई कर रहे हैं तो हमें कपड़ों के बाजार में भी होना चाहिए। उन्होंने बताया कि हम पुरुषों और महिलाओं के लिए कपड़े बनाएंगे जो कि सिर्फ पारंपरिक कपड़े ही नहीं होंगे, इसके साथ जींस जैसे मॉडर्न कपड़े भी बनाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं बाबा हूं इसका मतलब ये नहीं है कि हम आधुनिकता के साथ नहीं चल सकते।

उन्होंने कहा कि हमने पहले से ही नेपाल के बाजार में प्रवेश कर लिया है। बांग्लादेश के बाद, हमारा लक्ष्य अफ्रीका में प्रवेश करने का है। हम पहले विकासशील देशों में  कारोबार बढ़ाएं जहां बाजार की स्थितियां हमारे जैसी है। दूसरी स्टेज में हम बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ यूरोप और अमेरिका में भी प्रवेश करेंगे जहां प्राकृतिक उत्पादों की मांग बढ़ रही है।

बता दें कि हाल ही में बाबा रामदेव ने कहा था कि हमारा कारोबार अगले साल 10,000 करोड़ रुपए का पहुंच जाएगा। उन्होंने ये भी कहा था कि हम पशु आहार लेकर आएंगे जिसमें कोई यूरिया नहीं होगा। इससे मवेशियों को लाभ होगा। रामदेव ने दावा किया कि उन्होंने मवेशियों को जो आहार दिया जाता है, उसमें 1-4 प्रतिशत यूरिया होता है जिससे देश में 50 प्रतिशत गायों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

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