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आयुष्‍मान भारत: जिला अस्‍पतालों की लगेगी बोली! NITI आयोग ने बनाई योजना

सरकार इन प्राइवेट प्लेयर्स की फीस प्रोसिजर और सर्विस के पैकेज के मुताबिक देगी। यह बोली के समय सिलेक्शन के दौरान ही तय हो जाएगा। यह लाभार्थी की तरफ से निजी पार्टनर को रिम्बर्स किया जाएगा।

जिला स्तर पर पीपीपी मॉडल को अपनाने से जिला स्तर पर गरीबों का अच्छा इलाज हो सकेगा और इससे उनकी जेब पर भी ज्यादा खर्च नहीं पड़ेगा। (सांकेतिक फोटो)

सरकार गैर-संक्रमणीय बीमारियों से पीड़ित लोगों को जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए निजी क्षेत्र की फर्मों को साथ लाएगी, आयुषमान भारत के लॉन्च के बाद ऐसी सेवाओं की मांग में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। नीति आयोग ने बुधवार (17 अक्टूबर) को दिशानिर्देशों और विशेष सुविधा मॉडल समझौते का अनावरण किया जो प्राइवेट प्लेयर्स को जिला अस्पतालों में प्रवेश की सुविधा प्रदान करेगा, जिन्हें अभी तक केवल सरकार द्वारा ही चलाया जा रहा है। आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार, निजी प्लेयर्स  को पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी बोली-प्रक्रिया के आधार पर चुना जाएगा। राज्य सरकारों को उनकी आवश्यकता के आधार पर इन दिशानिर्देशों को अनुकूल करने की अनुमति दी जाएगी। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि इसका मकसद जिला स्तर पर  विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवा सुविधाएं प्रदान करना है।

सरकार ने दिशानिर्देशों में एक पे-पर-यूज मॉडल का सुझाव दिया है जिसके अंतर्गत राज्य सरकार जिला अस्पतालों में जगह प्रदान करेंगी, जबकि प्राइवेट प्लेयर बुनियादी ढांचे का निर्माण करेंगे और गैर-संक्रमणीय बीमारियों के इलाज के लिए उपकरणों और साथ ही मेन पावर प्रदान करेंगे। गैर-संक्रमणीय, या पुरानी, ​​बीमारियां लंबी अवधि की बीमारियां होती हैं और आमतौर पर धीरे धीरे होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस चार मुख्य प्रकारों में बांट रखा है। इसमें कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों (जैसे हर्ट अटैक और स्ट्रोक), कैंसर, पुराने सांस रोग (जैसे क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और अस्थमा) और डायबिटीज हैं।

सरकार इन प्राइवेट प्लेयर्स की फीस प्रोसिजर और सर्विस के पैकेज के मुताबिक देगी। यह बोली के समय सिलेक्शन के दौरान ही तय हो जाएगा। यह लाभार्थी की तरफ से निजी पार्टनर को रिम्बर्स किया जाएगा। आयुष्मान भारत के तहत यह समझौता 15 साल के लिए किया जाएगा। इसमें दरों की प्रतिबद्धता के साथ रिन्यूअल का ऑप्शन भी होगा। दिशानिर्देशों के मुताबिक, जिला स्तर पर पीपीपी मॉडल को अपनाने से जिला स्तर पर गरीबों का अच्छा इलाज हो सकेगा और इससे उनकी जेब पर भी ज्यादा खर्च नहीं पड़ेगा। राज्यों में प्रबंधन अनुबंध मॉडल का चयन, सेवाओं के मॉडल की खरीद, निर्माण, संचालन और मॉडल या सह-स्थान मॉडल को बीओटी अप्रोच के साथ स्थानांतरित करने का विकल्प होगा। BOT के तहत सरकार किसी प्राइवेट कंपनी  को कोई काम करने का ठेका देती है और फिर काम पूरा होने पर इसे सभी अधिकारों के साथ वापस ले लेती है। इसे बीओटी कहते हैं।

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