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आयुष्‍मान भारत: इन 5 राज्‍यों ने योजना लागू करने से किया इन्कार, जानिए क्‍या है वजह

ये राज्य तेलंगाना, ओडिशा, दिल्ली, केरल और पंजाब हैं, जो योजना से असंतुष्ट हैं। इन सभी का कहना है कि वे अपने राज्य में इसे तब तक लागू नहीं करेंगे, जब उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फोटोः पीटीआई)

नरेंद्र मोदी सरकार की महात्वाकांक्षी स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत के शुभारंभ के एक दिन बाद ही इसे पांच राज्यों ने लागू करने से इन्कार कर दिया। ये राज्य तेलंगाना, ओडिशा, दिल्ली, केरल और पंजाब हैं, जो योजना से असंतुष्ट हैं। इन सभी का कहना है कि वे अपने राज्य में इसे तब तक लागू नहीं करेंगे, जब उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाएगा। पांचों राज्यों ने दावा किया उनके यहां इससे बेहतर स्वास्थ्य योजनाएं हैं।

पीएम मोदी ने इससे पहले ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर योजना को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था। शनिवार (22 सितंबर) को उन्होंने एक जन सभा में कहा, “हर किसी को इस योजना की अहमियत पता है, पर नवीन बाबू इसे नहीं समझते हैं। ओडिशा सरकार को आगे आकर इस योजना से जुड़ना चाहिए।”


पटनायक ने इसी को लेकर पीएम को जवाब दिया। एक कार्यक्रम में वह बोले, “आयुष्मान भारत से अधिक राज्य की बीजू स्वास्थ्य कल्याणा योजना लोगों को लाभ पहुंचा रही है। महिलाओं को इसमें सात लाख रुपए तक का कवरेज मिलता है, जबकि केंद्र सरकार वाली स्कीम में पांच लाख रुपए का हेल्थ कवर मिलेगा।”

सीएम ने इसके अलावा पीएम को पेट्रोल के आसमान छूते दामों को काबू करने को लेकर हिदायत दी। हालांकि, 31 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस योजना को लागू करने के लिए राजी हैं।

क्या है आयुष्मान भारत?: यह योजना प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) के नाम से भी जानी जाती है। केंद्र सरकार के मुताबिक, यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य योजना है, जिससे देश के तकरीबन 50 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे। योजना का मुख्य उद्देश्य निचले और निचले मध्यम वर्गीय परिवारों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराना है। गरीब, वंचित ग्रामीण परिवार और शहर में रहने वाले श्रमिकों की पेशेवर श्रेणियां इस योजना के दायरे में आएंगी।

सोशियो इकनॉमिक एंड कास्ट सेंसस (एसईसीसी) के हिसाब से गांवों के ऐसे 8.03 करोड़ और शहरों से 2.33 परिवार इसमें शामिल किए जाएंगे। सरकार की इस योजना के अंर्तगत हर परिवार को सालाना पांच लाख रुपए का कवरेज मिलेगा। वे इसके जरिए सरकारी या निजी अस्पताल में अपना कैशलेस इलाज करा पाएंगे।

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