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AYODHYA VERDICT: मुस्लिम पक्ष की ओर से लड़ने वाले राजीव धवन हटाए गए! वरिष्ठ वकील बोले- मेरी सेहत के बारे में झूठ बोल लिया गया ऐक्शन

एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एजाज मकबूल ने सफाई देते हुए कहा है कि मेरे मुवक्किल (जमीयत-उलेमा-ए-हिंद) कल ही समीक्षा याचिका दायर करना चाहते थे। यह सब राजीव धवन के जरिए किया जाने वाला था। मैं उनका नाम याचिका में नहीं दे पाया, क्योंकि वह मौजूद नहीं थे।

Author Published on: December 3, 2019 11:16 AM
अयोध्या मामले में राजीव धवन मुस्लिम पक्ष के वकील रहे हैं। (फाइल फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को केस से हटा दिया गया है। राजीव धवन ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “जमीयत का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील एजाज मकबूल द्वारा मुझे बाबरी केस से हटा दिया गया है। मैंने बिना किसी आपत्ति के हटाए जाने वाले पत्र की स्वीकृति भेज दी है।”

इसके बाद राजीव धवन ने अपने दूसरे फेसबुक पोस्ट में हटाए जाने के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा, “मुझे खबर मिली है कि अरशद मदनी ने संकेत दिए हैं कि सेहत खराब होने के चलते मुझे हटाया है। यह पूरी तरह से बकवास है। उन्हें यह अधिकार है कि वह अपने वकील एजाज मकबूल को निर्देश दें कि वह मुझे हटा दें, उन्होंने यही किया है। लेकिन इसके पीछे जो कारण बताया जा रहा है वह दुर्भावनापूर्ण और झूठा है।”

वहीं, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एजाज मकबूल ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में सफाई पेश की है। उन्होंने कहा है,” यह कहना गलत है कि राजीव धवन को उनकी बीमारी के चलते केस (जमीयत उलेमा-ए-हिंद अयोध्या मामले) से हटा दिया गया था। मुद्दा यह है कि मेरे मुवक्किल (जमीयत-उलेमा-ए-हिंद) कल ही समीक्षा याचिका दायर करना चाहते थे। यह सब राजीव धवन के जरिए किया जाने वाला था। मैं उनका नाम याचिका में नहीं दे पाया, क्योंकि वह मौजूद नहीं थे। यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है।”

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि राजीव धवन को सिर्फ जमीयत उलेमा-ए-हिंद की तरफ से बतौर वकील हटाया गया है। जबकि, मामले में बाकी 5 मु्सलिम पक्षकार उन्हें अपना वकील बनाए रखना चाहते हैं।

गौरतलब है कि राम मंदिर-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक मुस्लिम पक्षकार ने सोमवार को पुनर्विचार याचिका दाखिल की। यह याचिका जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष सैयद असद रशीदी को ओर से दायर किया गया। इसमें कहा गया है कि विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला को देने और दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन मस्जिद को देने वाला सुप्रीम कोर्ट का फैसला खामियों से भरा है। अदालत ने अपने फैसले में माना कि विवादित स्थल पर मस्जिद को तोड़ना गलत था, बावजूद इसके विवादित स्थल हिंदू पक्षकार को दे दी गई।

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