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Ayodhya Verdict: फैसले वाले दिन UP में नहीं हुई कोई वारदात! हत्या, लूट-अपहरण, रेप समेत नहीं आई कोई शिकायत; अफसर हैरान

Ayodhya Verdict, UP Police: यूपी डीजीपी मुख्यालय ने 9 नवंबर के आंकड़े जुटाने शुरू किए तो हर जोन से अपराध के आकड़े शून्य मिले। जिसे देख मुख्यालय के अधिकारियों को यकीन नहीं हुआ।

Author लखनऊ | Updated: November 13, 2019 12:46 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर,फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

Ayodhya Verdict, UP Police: अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के फैसले वाले दिन एक रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। आंकड़ों की माने तो फैसले वाले दिन उत्तर प्रदेश में कहीं भी किसी भी प्रकार की हत्या, लूट, अपहरण, बलात्कार या डकैती की वारदात नहीं हुई है। इसकी जानकारी जब डीजीपी मुख्यालय के अधिकारियों को हुई तो उन्हें इस बात पर यकीन नहीं हुआ। हैरत की बात यह है कि राज्य के 75 जिलों से एक भी आपराधिक घटनाएं सामने नहीं आई।

 डीजीपी ने खुद संभाला मोर्चा:  बता दें कि बाबरी मस्जिद विवाद के फैसले वाले दिन पुलिस ने राज्य में सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक तैयारियां कर रखी थी। 8 नवंबर की रात जब इस बात की जानकारी हुई कि अगले दिन सुबह 10 बजे राम मंदिर पर फैसला आने वाला है तो डीजीपी से लेकर थाने और बीट स्तर पर पुलिस मुस्तैद हो गई। यही नहीं को खुद डीजीपी ओपी सिंह ने इसकी अगुवाई कर रहे थे।

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सोशल मीडिया की निगरानी ‘ऑपरेशन ईगल’ टीम ने की:  बता दें कि जब फैसले की तारीख और समय का ऐलान हुआ तब उस समय यूपी के डीजीपी आगरा में थे। उन्होंने वहीं से फोन पर अधिकारियों को निर्देश देना शुरु कर दिया। रात में पुलिस गश्त को बढ़ा दिया गया। यहीं नहीं सोशल मीडिया पर निगरानी करने के लिए ‘ऑपरेशन ईगल’ के नाम से एक टीम बनाई गई थी जो सोशल मीडिया पर नजर रखे हुई थी।

112 की कमान असीम अरुण ने संभाली: गौरतलब है कि राज्य के आईजी कानून व्यवस्था प्रवीण कुमार और सोशल सेल के एसपी मो. इमरान पूरी रात डीजीपी मुख्यालय पर मौजूद रहे। उनके साथ काम करने वाले सभी पुलिस कर्मियों ने साइबर पेट्रोलिंग करनी शुरू कर दी। यही नहीं प्रदेश के एकीकृत नियंत्रण कक्ष यूपी 112 पर रात में ही इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर स्थापित किए गए। एडीजी यूपी 112 असीम अरुण खुद इसकी निगरानी कर रहे थे।

पुलिस को नहीं हुआ यकीन: डीजीपी मुख्यालय ने 9 नवंबर के आंकड़ें जुटाने शुरू किए तो हर जोन से अपराध के आकड़े शून्य आने लगे। जिसे देख मुख्यालय के अधिकारियों को यकीन ही नहीं हुआ। इसके बाद दोबारा आकड़े मांगे तब भी यह आंकड़ा आया।

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