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Ayodhya Verdict: राम मंदिर के लिए पहला आंदोलन हिन्दुओं ने नहीं सिखों ने किया था, 1858 में हुई थी पहली FIR दर्ज- बाबरी ढांचे में घुस किया था हवन

Ayodhya Verdict: अवध के थानेदार रहे शीतल दुबे की एक रिपोर्ट के हवाले से ऐसा दावा किया जाता रहा है कि पंजाब के निहंग सिंह ने 28 नवंबर, 1858 को बाबरी मस्जिद नाम की संरचना में प्रवेश किया था और उसके बीचो-बीच श्रीराम की पूजा की थी।

Author नई दिल्ली | Updated: November 10, 2019 5:12 PM
खुदाई में विवादित स्थल के नीचे 10वीं शताब्दी के मंदिर के अवशेष मिले थे। (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

Ayodhya Verdict: अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। विवादित 2.77 एकड़ जमीन राम लला को देने का आदेश और तीन महीने के अंदर मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का आदेश कोर्ट ने दिया है। मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन दूसरी जगह पर देने का फैसला किया गया है। इस बीच अदालती कार्यवाही में जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर ये खबर निकली है कि राम मंदिर के लिए सबसे पहले आंदोलन सिखों ने किया था, हिन्दुओं ने नहीं। पत्रकार विकास भदौरिया ने इस बाबत 30 नवंबर 1858 को दर्ज एक एफआईआर की कॉपी साझा की है। रिपोर्ट में लिखा है, “निहंग सिख, बाबरी ढांचे में घुस गए हैं, राम नाम के साथ हवन कर रहे हैं।” यानी राम मंदिर के लिए पहली FIR हिंदुओं के खिलाफ नहीं सिखों के खिलाफ हुई थी।

अवध के थानेदार रहे शीतल दुबे की एक रिपोर्ट के हवाले से ऐसा दावा किया जाता रहा है कि पंजाब के निहंग सिंह ने 28 नवंबर, 1858 को बाबरी मस्जिद नाम की संरचना में प्रवेश किया था और उसके बीचो-बीच श्रीराम की पूजा की थी। निहंग सिंह ने वहां न सिर्फ हवन और पूजा की बल्कि उस परिसर के भीतर श्रीराम का प्रतीक भी बनाया। उस वक्त उनके साथ 25 और सिख थे, जिन्होंने मस्जिद में धार्मिक झंडे उठाए और मस्जिद की दीवारों पर चारकोल के साथ ‘राम-राम’ लिखा था।

बाद में सिखों ने मस्जिद परिसर में मिहराब और मिम्बर के पास एक चबूतरा बनाया और उस पर भगवान की मूर्ति की तस्वीर रखी। इससे खफा बाबरी मस्जिद की देखरेख करने वाले मोहम्मद असगर दो दिन बाद ब्रिटिश सरकार के पास मामले की शिकायत दर्ज करने पहुंचे, जब आश्वस्त हो गये कि निहंग सिंह शहर से जा चुका है।

बता दें कि बाद में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन चलाया। 1990 के दशक में बीजेपी ने इस मुद्दे को अपना लिया और लालकृष्ण आडवाणी ने मंगिर निर्माण के लिए सोमनाथ से लेकर अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। अक्टूबर 1990 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने आडवाणी के रथ को रोक लिया था और समस्तीपुर में उन्हें गिरफ्तार करवा दिया था।

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