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Ayodhya Verdict का आधार बनी ASI रिपोर्ट को किताब की शक्ल में लाएगी मोदी सरकार

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने साल 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश के बाद खुदाई शुरू की थी। खुदाई में विवादित स्थल के नीचे 10वीं शताब्दी के मंदिर के अवशेष मिले थे।

खुदाई में विवादित स्थल के नीचे 10वीं शताब्दी के मंदिर के अवशेष मिले थे। (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

अयोध्या मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की जिस रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है अब वह किताब की शक्ल में लोगों के बीच आएगी। केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रह्लाद पटेल ने शनिवार को यह घोषणा की। एसएसआई ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर खुदाई के बाद सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल की थी।

अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने विवादित स्थल पर खुदाई करने वाली एएसआई की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘मैं उन सभी विशेषज्ञों को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए काम किया।’

मालूम हो कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने साल 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश के बाद खुदाई शुरू की थी। खुदाई में विवादित स्थल के नीचे 10वीं शताब्दी के मंदिर के अवशेष मिले थे। जबकि 1992 में गिराई गई बाबरी मस्जिद का निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ था।

शनिवार को सुनाए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम पक्ष की तरफ से इबादत किए जाने के कारण एएसआई की खुदाई में मिले अवशेषों को अनुमान और कमजोर साक्ष्य मानकर खारिज नहीं किया जा सकता है। पांच सदस्यों वाली पीठ ने कहा कि एसआईई की तरफ से दाखिल की गई रिपोर्ट एक विचार है। फिर भी यह एक सरकारी एजेंसी की राय है।

अदालत ने एएसआई की इस बात से सहमत था कि विवादित स्थल पर 12वीं शताब्दी में हिंदू धर्म के मूल का एक ढांचा था। मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद ढांचे के ऊपर हुआ था। हालांकि, अदालत ने कहा एएसआई की रिपोर्ट में कोई विशेष खोज सामने नहीं आई है।

अदालत ने इस बात का भी उल्लेख किया कि एएसआई इस बात के प्रमाण नहीं दे पाया कि राम मंदिर को तोड़ कर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि एएसआई की खुदाई में जो अवशेष मिले हैं वह दरगाह के हैं।

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