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राम मंदिर मुद्दे पर नरेंद्र मोदी से भी आक्रामक थे पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी

6 दिसंबर, 1992 को बाबरी विध्वंस से एक दिन पहले 5 दिसंबर को लखनऊ में एक सभा में वाजपेयी ने खुले तौर पर राम मंदिर पर अपनी बात रखी थी।

Author नई दिल्ली | Updated: September 20, 2019 3:34 PM
पूर्व पीएम वाजपेयी ने संसद से लेकर सड़क तक राम मंदिर के लिए आवाज बुलंद की थी। (फाइल फोटो)

अयोध्या में रामजन्म भूमि विवाद का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। पांच जजों की संविधान पीठ उस पर रोजाना सुनवाई कर रही है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने 18 अक्टूबर तक सभी पक्षों से बहस पूरी कर लेने को कहा है। इसके बाद से अटकलें लगाई जाने लगी हैं कि नवंबर में इस पर सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना सकता है।

कई भाजपाई नेता और मंदिर निर्माण के समर्थकों ने तो यहां तक कह दिया कि कोर्ट मंदिर के पक्ष में ही फैसला सुनाएगा। इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी बड़बोले नेताओं को संयम बरतने और श्रीराम में श्रद्धा रखने की नसीहत दी है। पीएम मोदी संकेत की भाषा में ही राम मंदिर निर्माण का जिक्र करते रहे हैं लेकिन भूतपूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी राम मंदिर के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी से ज्यादा आक्रामक थे।

वाजपेयी जी ने संसद से लेकर सड़क तक राम मंदिर के लिए आवाज बुलंद की। 1996 में 13 दिनों की सरकार के विश्वास मत परीक्षण के दौरान भी उन्होंने कहा था कि चूंकि जनता ने उन्हें बहुमत नहीं दिया है, इसलिए वो सहयोगी दलों के साथ आम धारणा बनाकर शासन करने में विश्वास रखते हैं। अगर बीजेपी को बहुमत मिला तो राम मंदिर, अनुच्छेद 370, समान नागरिक संहिता पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।

एक अन्य सभा को संबोधित करते हुए वाजपेयी जी ने कहा था, “एक विदेशी राजनयिक भारत आए थे, उन्होंने पूछा था कि ये राम मंदिर विवाद क्या है? हमने कहा कि भगवान श्रीराम कहां पैदा हुए थे, ये विवाद चल रहा है। और जहां पैदा हुए थे, वो स्थान उनके मंदिर के लिए प्रयुक्त किया जाय या नहीं? वो मुसलमान थे और इंडोनेशिया से आए थे। कहने लगे, हम तो समझते थे कि राम के लिए पूरे भारत में आदर होगा, सम्मान होगा।”

बतौर वाजपेयी, तब इंडोनेशियाई अतिथि ने कहा कि इंडोनेशिया में बहुत सारे लोगों ने इस्लाम को स्वीकार कर लिया लेकिन श्रीराम को विस्मृत होने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि बाली में एक महीने तक रामलीला का मंचन होता है।

वाजपेयी ने तब वहां के विदेश मंत्री से पूछा था कि रामलीला से आप का क्या संबंध है आप तो मुसलमान हैं? तब इंडोनेशियाई मंत्री ने कहा था कि वो आज मुसलमान हैं लेकिन इससे हमारा संबंध पुराना है और तबका संबंध है, जब हमलोग मुसलमान नहीं हुए थे। वाजपेयी जी ने थाईलैंड की भी चर्चा अपने भाषणों में की थी और कहा था कि थाईलैंड की राजधानी को अयोध्या और वहां के राजा को आज भी राम कहा जाता है।

6 दिसंबर, 1992 को बाबरी विध्वंस से एक दिन पहले 5 दिसंबर को लखनऊ में एक सभा में वाजपेयी ने खुले तौर पर राम मंदिर पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने तब कहा था, “वहां नुकीले पत्थर निकले हैं। उन पर तो कोई नहीं बैठ सकता तो जमीन समतल करना पड़ेगा, बैठने लायक करना पड़ेगा। यज्ञ का आयोजन होगा तो कुछ निर्माण भी होगा। कम से कम वेदी तो बनेगी। मैं नहीं जानता वहां कल क्या होगा। मेरी अयोध्या जाने की इच्छा है लेकिन मुझे कहा गया है कि तुम दिल्ली रहो।”

वाजपेयी ने तब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को समझाते हुए कहा था कि कोर्ट ने हमें कारसेवा की अधिकार दिया है, रोका नहीं है। कारसेवा करने से कोर्ट की अवहेलना नहीं होगी।

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