अयोध्या के राम मंदिर दान विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने साफ कहा कि जिसके पास भी किसी तरह के सबूत हैं, वह उन्हें विशेष जांच दल (SIT) को सौंपे। योगी ने भरोसा जताया कि जांच पूरी होने के बाद ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ हो जाएगा।
योगी आदित्यनाथ ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोई भी इस मामले में अनर्गल बातें ना करे और बयानबाजी से बचें। उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी के पास कोई दस्तावेजी सबूत है तो इसे एसआईटी को दे दें। एसआईटी जांच में सबकुछ साफ हो जाएगा। हम लोगों के पूर्वजों ने 500 वर्षों तक प्रभु श्री राम के स्थान को लेने के लिए मर्यादित रहकर संघर्ष किया है, 15 दिन और देख लें, इंतजार करें। 15 दिन रिपोर्ट का इंतजार करें।
इसके साथ ही उन्होंने एसपी-कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “जो लोग कभी जय श्री राम कहने पर इसी अयोध्या के नाम पर रामभक्तों पर लाठी- गोली चलाने का काम करते थे, वही आज उपदेश दे रहे हैं। बाबर की पूजा करने वाले राम की बात कर रहे हैं। ये लोग कभी सफल नहीं होंगे। ये लोग चाहेंगे कि अयोध्या को सम्मान ना मिले। अयोध्या धाम को बदनाम करना चाहते हैं। इनके बहकावे में ना आएं। इनका आचरण पहले से ही आप सभी के सामने है।”
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि SIT की रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए। ट्रस्ट के अनुरोध पर ही एसआईटी का गठन हुआ।
क्या है राम मंदिर दान गबन विवाद?
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए नकद और कीमती आभूषणों में कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद यह विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि मंदिर के दानपात्रों से निकाले गए सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों को नकली वस्तुओं से बदला गया जबकि कुछ मामलों में दान की रकम में हेराफेरी और चोरी की भी आशंका जताई गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। SIT दान की गिनती, लेखा-जोखा, बैंक में जमा करने की प्रक्रिया और दान प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है। हालांकि, अब तक पुलिस के पास इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है।
राम जन्मभूमि क्षेत्र तीर्थ ट्रस्ट ने आरोपों पर सीधे तौर पर कोई निष्कर्ष निकालने से बचते हुए जांच पूरी होने का इंतजार करने की बात कही है। वहीं विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बनाते हुए सरकार और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
राम नाम की लूट है…आस्था, दान और भरोसे के कटघरे में राम मंदिर
“राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट, अंत समय पछताएगा जब प्राण जाएंगे छूट।” इस दोहे का भाव यह है कि ईश्वर का नाम सबसे बड़ा धन है जिसे जितना चाहो अपना सकते हो। लेकिन विडंबना देखिए कि आज के दौर में पैसे की लालसा इतनी बढ़ गई है कि भगवान के नाम पर चढ़ाए गए दान पर भी सवाल उठने लगे हैं। पढ़ें पूरा विचार यहां…
