Ayodhya Ram Mandir Controversy: अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में आए दान के कथित गबन के विवाद ने संघ परिवार के भीतर विश्व हिंदू परिषद यानी VHP को बड़ा झटका दिया है। वीएचपी हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए लंबे समय से अभियान चला रहा है, लेकिन इस विवाद ने उसके सामने नई चिंताएं पैदा कर दी है।
हालांकि, विश्व हिंदू परिषद ने आधिकारिक तौर पर यही कहा है कि कथित चोरी से उसके प्रयासों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दूसरी ओर आरएसएस के व्यापक ढांचे के भीतर की कई संस्थाओं का मानना है कि मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के मामले में, राम मंदिर के विवाद की वजह से झटका लगा है।
VHP ने 2021 में पारित किया था प्रस्ताव
विश्व हिंदू परिषद ने एक वरिष्ठ नेता ने इस मामले में कहा, “अभी तो लगता है यह अभियान खटाई में पड़ गया है।” विश्व हिंदू परिषद ने मंदिरों के मामलों में सरकारी हस्तक्षेप के मुद्दे को लगातार उठाया है। 17-18 जुलाई, 2021 को फरीदाबाद में हुई अपनी न्यासी मंडल की बैठक में पारित एक प्रस्ताव में वीएचपी ने केंद्र से हिंदू मंदिरों और धार्मिक संस्थानों को हिंदू समाज को सौंपने वाला कानून बनाने की कही थी।
इस प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया कि श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार मंदिरों द्वारा संचालित धार्मिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य और सामाजिक गतिविधियों के समर्थन में दान दें। इसके अलावा इस बात पर भी जोर दिया गया कि मंदिरों को सरकारी संपत्ति नहीं माना जाना चाहिए।
सरकारी खजाने में मंदिरों का पैसा जाने की बात
इतना ही नहीं, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों और उससे जुड़े धार्मिक नेताओं ने अपनी मांग को पुष्ट करने के लिए अक्सर बड़ी-बड़ी वित्तीय रकमों का हवाला दिया है। 24 जनवरी 2025 को प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में अवधेशानंद गिरि ने दावा किया कि मंदिरों से 1.86 लाख करोड़ रुपये का दान सरकारी खजाने में आ रहा है।
गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में महाराष्ट्र के जलगांव में हुई विश्व हिंदू परिषद की बैठक में इस बात को दोहराया गया कि मंदिरों का प्रबंधन हिंदुओं द्वारा किया जाना चाहिए और उनके धन का उपयोग विशेष रूप से हिंदू समाज के लाभ के लिए किया जाना चाहिए।
नए सिरे से बनेगी रणनीति
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि संगठन का मनोबल अभी भी बरकरार है। उन्होंने कहा, “हम पहले ही कई राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों से मुलाकात कर चुके हैं। आगे की रणनीति 19-20 जुलाई को दिल्ली में होने वाली न्यासी मंडल की बैठक में तय की जाएगी।”
RSS को किस बात की चिंता?
हालांकि, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कुछ वरिष्ठ आरएसएस प्रचारकों ने चिंता भी जताई है। उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख रणनीतिकार ने कहा, “अयोध्या की हालिया घटना ने हिंदू मंदिरों को मुक्त कराने के अभियान को कमजोर कर दिया है। राम मंदिर में चढ़ावे और दान का उचित प्रबंधन न कर पाने से यह उजागर हो गया है कि हमने इस कार्य के लिए सही लोगों का चयन नहीं किया है। आगे बढ़ने से पहले हमें लोगों का विश्वास बहाल करना होगा।”
एक अन्य प्रचारक ने कथित चोरी को एक बड़ा झटका बताते हुए कहा, “राम जन्मभूमि कोई साधारण मंदिर नहीं है। अगर हम यहां असफल हुए हैं, तो लोग स्वाभाविक रूप से अन्य मंदिरों के प्रबंधन की हमारी क्षमता पर सवाल उठाएंगे। हालांकि लोगों ये भी न भूलें कि सरकारी मंदिरों में भी ऐसे आरोप लगते हैं। सच्चाई यह है कि उन मंदिरों में समय-समय पर धन के कुप्रबंधन और अन्य संबंधित आरोप अधिक गंभीर रहे हैं।”
हालांकि, चिंताओं के बावजूद विश्व हिंदू परिषद अपनी मांग के समर्थन में देश भर के विधायकों से मिलकर अपना अभियान तेज करने की योजना बना रहा है। मंदिर मुक्त कराने के अभियान में शामिल वीएचपी के एक नेता ने सावधानीपूर्वक आशा जताते हुए कहा, “यह एक झटका है, लेकिन लोगों की याददाश्त जल्दी कमजोर हो जाती है। इन आरोपों के बावजूद अयोध्या में चढ़ावे, दान और श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। कुछ महीनों में यह बात भुला दी जाएगी।”
तत्कालिक कार्रवाई पर जोर
दूसरी ओर एक अन्य पदाधिकारी का दृष्टिकोण इससे भिन्न था। उन्होंने तत्कालिक कार्रवाई को एक जरूरत बताया है। उन्होंने कहा, “हमें जनता का विश्वास तत्काल बहाल करना होगा। अगले कुछ महीने बेहद महत्वपूर्ण हैं। अयोध्या में दर्ज एफआईआर की शीघ्र जांच होनी चाहिए और त्वरित सुनवाई होनी चाहिए। सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि हम विश्वास को कितने प्रभावी ढंग से पुनर्स्थापित करते हैं।”
बता दें कि देश में लगभग 10 लाख मंदिर होने का अनुमान है। हालांकि, एक सच यह भी है कि इसको लेकर कोई आधिकारिक और व्यापक गिनती नहीं हुई है। इनमें से अधिकांश छोटे और समुदाय द्वारा प्रबंधित हैं, जबकि बड़े मंदिरों का प्रशासन लंबे समय से विवादित रहा है। कई मंदिर राज्य-विशिष्ट कानूनों द्वारा शासित हैं, इसके चलते उन पर सरकारी नियंत्रण है।
क्या अभियान में फिर तेजी ला पाएगा VHP?
कुछ साल पहले अखिल भारतीय आचार्य सभा के महासचिव स्वामी परमात्मानंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। इसमें विश्व हिंदू परिषद सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे ताकि इन मुद्दों का समाधान किया जा सके। अयोध्या विवाद ने एक बार फिर इस बात पर ध्यान केंद्रित कर दिया है कि क्या विश्व हिंदू परिषद इस चुनौती से पार पाकर अपने प्रमुख मंदिर मुक्ति अभियान को तेजी दे पाएगा या नहीं।
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राम मंदिर निर्माण में कथित फंड गड़बड़ी के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को अयोध्या पहुंचेगा और रामलला के दर्शन करेगा। इसे एक ओर आस्था से जुड़ा संदेश देने और दूसरी ओर इस विवाद को लेकर भाजपा पर निशाना साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पढ़िए पूरी खबर…
