‘राम मंदिर निर्माण में पीएम मोदी का कोई योगदान नहीं’, बोले- बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी, 5 साल से राम सेतु की फाइल पड़ी है उनकी टेबल पर

स्वामी ने कहा कि 'जिन लोगों ने काम किया उनमें राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और अशोक सिंहल का नाम शामिल है। स्वामी ने ये भी कहा कि वाजपेयी ने भी इसमें अड़ंगा अड़ाया था। अशोक सिंहल ने उन्हें ये बात बतायी थी।'

ram mandir ayodhya pm narendra modiअयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास पीएम मोदी करेंगे। (फाइल फोटो)

आगामी पांच अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन होना है। भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा, जिसके लिए बड़े स्तर पर अयोध्या में तैयारियां चल रही हैं। इस बीच भाजपा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने अपने एक बयान में कहा है कि ‘राम मंदिर निर्माण निर्माण में पीएम मोदी का तो कोई योगदान नहीं है।’ भाजपा सांसद ने ये भी कहा कि ‘पांच साल से राम सेतु की फाइल उनकी टेबल पर पड़ी हुई है।’

दरअसल एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में स्वामी से सवाल पूछा गया कि राम मंदिर भूमि पूजन में और किन-किन लोगों को बुलाया जाना चाहिए था, जिन्हें नहीं बुलाया गया है। इसके जवाब में स्वामी ने कहा कि “राम मंदिर में प्रधानमंत्री का कोई योगदान नहीं है। सारी बहस हमने की। जहां तक मैं जानता हूं सरकार की तरफ से उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया है, जिसके बारे में कह सकें कि उसकी वजह से निर्णय आया है।”

स्वामी ने कहा कि ‘जिन लोगों ने काम किया उनमें राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और अशोक सिंहल का नाम शामिल है। स्वामी ने ये भी कहा कि वाजपेयी ने भी इसमें अड़ंगा अड़ाया था। अशोक सिंहल ने उन्हें ये बात बतायी थी।’

भाजपा सांसद ने कहा कि राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने के लिए फाइल प्रधानमंत्री की टेबल पर पिछले 5 साल से पड़ी है लेकिन उन्होंने अभी तक इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। स्वामी ने कहा कि मैं कोर्ट जाकर आदेश दिलवा सकता हूं लेकिन मुझे बुरा लगता है कि हमारी पार्टी होने के बावजूद भी हमें कोर्ट जाना होता है।

सुब्रमण्यन स्वामी ने अपने एक बयान में कहा था कि राजीव गांधी अगर दोबारा पीएम बनते तो अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो चुका होता। राजीव गांधी ने विवादित स्थल का ताला खुलवा दिया था और राम मंदिर के लिए शिलान्यास कार्यक्रम की अनुमति भी दे दी थी लेकिन उनके असामयिक निधन से चीजें बदल गईं।

लोकमत की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व पीएम नरसिम्हा राव के करीबी रहे एक केन्द्रीय मंत्री ने खुलासा किया है कि 1992 में बाबरी विध्वंस से पहले ही राव अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कराना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने एक कार्ययोजना भी तैयार कर ली थी लेकिन तब विभिन्न मठों के शंकारचार्यों और पीठाधीशों के बीच मतभेद के चलते उनकी योजना सफल नहीं हो सकी थी। राम मंदिर आंदोलन के धार देने का काम विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंहल ने किया था।

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