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टीवी चैनल पर राम जन्मभूमि न्यास के महंत के खिलाफ अयोध्या के संत ने की थी टिप्पणी, पुलिस ने लिया हिरासत में

"आपत्तिजनक" टिप्पणियों के प्रसारण के बाद नृत्य गोपाल दास के समर्थकों द्वारा तपस्वी चवन्नी मंदिर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया और उनकी गिरफ्तारी की मांग की गई।

Author नई दिल्ली | Updated: November 15, 2019 1:16 PM
अयोध्या में तपस्विनी मंदिर के पुजारी परमहंस दास ने गोपाल दास के खिलाफ विवादित टिप्पणी की।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में तपस्विनी मंदिर के पुजारी परमहंस दास को एक टीवी चैनल पर राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने के आरोप में गुरुवार को हिरासत में लिया गया। “आपत्तिजनक” टिप्पणियों के प्रसारण के बाद नृत्य गोपाल दास के समर्थकों द्वारा तपस्वी छावनी मंदिर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया और उनकी गिरफ्तारी की मांग की गई। सैकड़ों की संख्या में समर्थकों ने तपस्वी छावनी पहुंचकर घेराबंदी की। सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। हालांकि, उन्हें शाम को रिहा कर दिया गया क्योंकि पुलिस ने कहा कि छोटी चवनी मंदिर, जहां नृत्‍य गोपाल दास पुजारी हैं, ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया।

अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी ने पीटीआई से कहा, “हमने परमहंस को हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में छोटी छावनी मंदिर ने उनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया, इसलिए हमने उन्हें रिहा कर दिया।” अपनी रिहाई के बाद परमहंस दास ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने पीटीआई से कहा “मैं कुछ समय के लिए अयोध्या जा रहा हूं और कुछ दिनों के लिए बनारस में रहुंगा।” राम जन्मभूमि न्यास का गठन विहिप के सदस्यों द्वारा 18 दिसंबर 1985 को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के उद्देश्य से किया गया था।

गौरतलब है कि शनिवार को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अयोध्या की विवादित जमीन का अधिकार हिंदू पक्ष को दे दिया है। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाया जाए, जो मंदिर निर्माण का काम देखे। वहीं मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि केंद्र या राज्य सरकार अयोध्या में उचित स्थान पर मस्जिद बनाने को जमीन दे।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया था। कोर्ट ने भगवान की सेवा और संपत्ति के प्रबंधन के अधिकार के दावे को खारिज कर दिया था। लेकिन, खंडपीठ ने विवादित स्थल पर “निर्मोही अखाड़े की ऐतिहासिक उपस्थिति और उनकी भूमिका” पर ध्यान देते हुए केंद्र को निर्देश दिया कि ट्रस्ट बनाने के लिए एक योजना तैयार करते हुए, अखाड़े को “प्रबंधन में एक उपयुक्त भूमिका” सौंपे।

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