अयोध्या में स्थित राम मंदिर में चढ़ावे में हेरफेर के आरोपों के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के द्वारा तीन सदस्यों वाली सर्च कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी में सुरेश हावरे के अलावा रिटायर्ड जज प्रदीप कोहली और लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी शामिल हैं। इस कमेटी का काम राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति करना है।
सुरेश हावरे ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि मंदिर ट्रस्ट का जो भी सीईओ हो, वह राम भक्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीईओ में राम के प्रति श्रद्धा का भाव होना चाहिए।
कौन हैं सुरेश हवारे?
सुरेश हावरे परमाणु वैज्ञानिक रहे हैं और उन्होंने परमाणु ऊर्जा विभाग में 27 साल तक काम किया है। मौजूदा वक्त में हावरे रायपुर के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के अध्यक्ष और श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के सदस्य हैं। उन्होंने ‘टेम्पल मैनेजमेंट’ नाम से किताब भी लिखी है। हावरे शिरडी में स्थित श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट के प्रमुख भी रह चुके हैं।
हावरे इन दिनों अमरनाथ यात्रा पर गए हुए हैं। उन्होंने ट्रस्ट के सदस्य के रूप में मिली जिम्मेदारी को तिरुपति, शिरडी और देश के कई बड़े कारोबारी संगठनों के प्रबंधन से भी से भी बड़ी चुनौती बताया है।
जनता के भरोसे का है सवाल
हवारे ने कहा, “हमारे सामने चुनौती बहुत बड़ी है क्योंकि यह जनता के भरोसे का सवाल है। एक बार भरोसा टूट जाए तो उसे दोबारा बनाने में सालों लग जाते हैं। इसलिए, जो व्यवस्था हम बनाएं, वह पारदर्शी होनी चाहिए। मंदिर के प्रबंधन के लिए मजबूत सिस्टम तैयार करना होगा।” हवारे ने आगे कहा, “सबसे पहली जरूरत है राम के प्रति श्रद्धा का भाव।”
अलग मॉडल की जरूरत क्यों?
जब उनसे पूछा गया कि अयोध्या में प्रशासन के लिए अलग मॉडल की जरूरत क्यों है तो हवारे ने कहा, इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। हावरे ने कहा, “तिरुपति में हर दिन लगभग 1 से 1.5 लाख श्रद्धालु आते हैं, जबकि शिरडी में लगभग 70,000-80,000। अयोध्या में एक दिन में 2 लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं और विशेष अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है।”
हवारे ने कहा कि एक और पहलू राम मंदिर से जुड़ी भावनाएं हैं। “यह सिर्फ एक नया बना मंदिर नहीं है, बल्कि 500 सालों से अधिक के संघर्ष से जुड़ा है। हर हिंदू का इससे भावनात्मक जुड़ाव है। यह आस्था और पहचान का प्रतीक है… यह शायद देश का सबसे बड़ा मंदिर संस्थान है… इससे जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।”
हवारे ने कहा कि सीईओ इस ट्रस्ट की रीढ़ की हड्डी बनेंगे और इसके कामकाज और प्रबंधन के हर पहलू की देखरेख करेंगे। उन्होंने कहा कि मंदिर का प्रबंधन करना विशेषज्ञता वाला क्षेत्र बन चुका है और इसमें वित्त, निवेश, बैंकिंग, अकाउंटिंग, मानव संसाधन प्रबंधन, भीड़ और आपदा प्रबंधन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल बढ़ रहा है।
सिर्फ पेशेवर शख्स नहीं कर सकता मंदिर का संचालन
हवारे ने कहा, “सिर्फ एक पेशेवर व्यक्ति इस तरह के मंदिर का संचालन नहीं कर सकता। सबसे पहली जरूरत भगवान राम के प्रति श्रद्धा का भाव है। दूसरी जरूरत समाज सेवा की भावना और श्रद्धालुओं के प्रति सम्मान है। इसके बाद ही वित्त, मानव संसाधन, सामग्री प्रबंधन, संस्थागत प्रशासन और मंदिर प्रबंधन का अनुभव देखा जाएगा।”
सीईओ का चयन कैसे होगा, इस बारे में हवारे ने कहा, “हमारा पहला काम यह तय करना है कि हम किस तरह के व्यक्ति की तलाश कर रहे हैं। हम पहले ऑनलाइन मिलेंगे, उसके बाद आमने-सामने बैठक होगी। इसके बाद, हम योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मंगाएंगे, आवेदन की गहन जांच होगी, इंटरव्यू लेंगे, उनके बैकग्राउंड की जांच करेंगे और आखिर में ट्रस्ट के सीईओ के लिए नामों की सूची तैयार करेंगे।”
हवारे ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया बहुत तेजी से होगी और चूंकि यह करोड़ों लोगों की आस्था का मामला है इसलिए इसे प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा।
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अयोध्या में श्री राम मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि इस बार मामला भूमि विवाद या मंदिर निर्माण का नहीं बल्कि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चोरी और उससे जुड़ी जांच का है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
