Ayodhya Case: “क्या कभी पैंगमर मोहम्मद और जीसस के जन्म स्थान पर सवाल उठाए गए हैं?”: सुप्रीम कोर्ट

Ayodhya Case: सुनवाई के दौरान वकील के परासरन ने मंदिर के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि "इतिहास की किताबों से पता चलता है कि मंदिर इसी जगह पर था। विभिन्न ग्रन्थों जैसे वाल्मिकी रामायण आदि में भी इस बात का जिक्र है कि अयोध्या में ही भगवान राम का जन्म हुआ।

Author नई दिल्ली | August 8, 2019 8:28 AM
ram mandirनिर्मोही अखाड़े और रामलला विराजमान के वकीलों ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा।

Ayodhya Case: राम मंदिर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। बुधवार को सुनवाई का दूसरा दिन था। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या कभी किसी भगवान, पैगंबर या जीसस के जन्म का मुद्दा दुनिया के किसी कोर्ट में उठाया गया है? दरअसल बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान निर्मोही अखाड़े और रामलला विराजमान के वकीलों ने अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान जस्टिस एसए बोबडे ने रामलला विराजमान के वकील के परासरन से सवाल किया कि “इस तरह का सवाल कि पैगंबर या जीसस कहां पैदा हुए, ये कभी दुनिया की किसी अदालत में उठाया गया है?”

इसके जवाब में वकील के परासरन ने कहा कि यह चेक करना पड़ेगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही है। इस पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसए अब्दुल नजीर और जस्टिस एसए बोबडे शामिल हैं।

सुनवाई के दौरान वकील के परासरन ने मंदिर के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि “इतिहास की किताबों से पता चलता है कि मंदिर इसी जगह पर था। विभिन्न ग्रन्थों जैसे वाल्मिकी रामायण आदि में भी इस बात का जिक्र है कि अयोध्या में ही भगवान राम का जन्म हुआ। साथ ही लोगों की आस्था है कि यह भगवान राम का जन्मस्थान है। यह अपने आप में सबसे बड़ा सबूत है।”

परासरन ने अपने तर्क के पक्ष में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र किया, जिसमें कोर्ट ने साल 1886 में फैजाबाद जिले के तत्कालीन जज एफईए चेमियर के उस फैसले का जिक्र किया था, जिसमें जज ने महंत रघुबर दास की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें महंत ने विवादित स्थल के एक हिस्से पर अपना दावा जताया था।

परासरन ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि “इस मामले में पहले आए फैसले को देखने के बाद पता चलता है कि जज ने विवादित स्थल का दौरा किया था और उन्होंने रिकॉर्ड किया कि अयोध्या में मस्जिद मुगल शासक बाबर द्वारा बनवायी गई थी और यह साफ है कि यह एक कब्जा था। जज ने अपने फैसले में इस बात पर नाराजगी भी जतायी थी कि मस्जिद, हिंदुओं के लिए पवित्र जगह पर बनायी गई। चूंकि घटना 358 साल पुरानी थी, इसलिए जज ने अपने फैसले में यथास्थिति को बरकरार रखने का फैसला दिया था।”

इससे पहले निर्मोही अखाड़े ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा। इस पर कोर्ट ने अखाड़े से विवादित जमीन के राजस्व रिकॉर्ड आदि के सबूत मांगे। हालांकि अखाड़े के वकील कोर्ट में सबूत पेश नहीं कर पाए।

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