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अयोध्या केस: मुस्लिम पक्ष ने SC से पूछा- हमसे ही क्यों पूछे जा रहे सारे सवाल? वकील ने कहा- श्रद्धा से जमीन नहीं मिलती

राजीव धवन ने अपनी दलील में कहा कि 'वादी (हिंदू) विवादित भूमि का मालिक है, इस बात का भी कोई सबूत नहीं है। हिंदुओं को सिर्फ भूमि के उपयोगा का अधिकार था। उन्हें पूर्वी दरवाजे से प्रवेश करने और पूजा करने का अधिकार था, इससे ज्यादा कुछ नहीं।'

Author नई दिल्ली | Published on: October 14, 2019 4:18 PM
अयोध्या में विवादित स्थल (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

अयोध्या मामले में सुनवाई अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में केस की सुनवाई का 38वां दिन है। सोमवार को सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की तरफ से उनके वकील राजीव धवन ने अपनी दलीलें रखी। मंगलवार से हिंदू पक्ष की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दलीलें रखी जाएंगी। आज मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने कोर्ट में कहा कि ‘अदालत द्वारा सभी सवाल मुस्लिम पक्ष से ही किए गए हैं, जबकि हिंदू पक्ष से एक भी सवाल नहीं किया गया है।’

राजीव धवन ने कहा कि सुनवाई के दौरान उन्हें जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला है, जो समय सीमा तय की गई है, वो काफी नहीं है। बता दें कि अयोध्या केस में 17 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी हो सकती है। वहीं नवंबर में अयोध्या केस में फैसला आने की उम्मीद जतायी जा रही है। फिलहाल सुरक्षा की दृष्टि से अयोध्या में 10 दिसंबर तक के लिए धारा 144 लागू कर दी गई है।

राजीव धवन ने अदालत में दलील देते हुए कहा कि इस बात के कोई सबूत नहीं दिए गए हैं, जिनसे पता चले कि केन्द्रीय गुंबद के नीचे ही राम का जन्म हुआ। वहीं श्रद्धालुओं के वहां फूल प्रसाद चढ़ाने का दावा भी सिद्ध नहीं किया गया है। धवन ने कहा कि गुंबद के नीचे ट्रेसपासिंग कर लोग घुस आए थे। कभी भी मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनायी गई, वहां लगातार नमाज होती रही थी।

राजीव धवन ने मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से कहा कि साल 1885 से 1889 के बीच हिंदू पक्ष द्वारा कभी जमीन पर दावा नहीं किया गया, जबकि साल 1854 से ही तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा मस्जिद के रखरखाव का खर्च दिया जाता रहा था। उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा भी कभी ये नहीं कहा गया कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनायी गई।

राजीव धवन ने अपनी दलील में कहा कि ‘वादी (हिंदू) विवादित भूमि का मालिक है, इस बात का भी कोई सबूत नहीं है। हिंदुओं को सिर्फ भूमि के उपयोगा का अधिकार था। उन्हें पूर्वी दरवाजे से प्रवेश करने और पूजा करने का अधिकार था, इससे ज्यादा कुछ नहीं।’ वहीं राजीव धवन की दलील पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि साल 1858 के बाद के दस्तावेजों से पता चलता है कि राम चबूतरा की स्थापना की गई और उनके पास अधिकार था।

राजीव धवन ने कोर्ट में कहा कि विश्वास, यात्रा, स्कंदपुराण उन्हें (हिंदुओं) को जमीन का मालिकाना हक नहीं दे सकते। मुसलमानों का कब्जा कभी संदेह में नहीं था। धवन ने कोर्ट में कहा कि मुस्लिम पक्ष की मांग है कि अयोध्या को फिर से 5 दिसंबर, 1992 जैसा बसाया जाए, जैसा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस से पहले था।

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