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अयोध्या मामला: जिस किताब का नक्शा फाड़ा गया, उसमें बाबर को बताया गया है उदार शासक

हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह ने दलीलें पेश करते हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल की कितान 'Ayodhya Revisited' में छपे एक नक्शे को हाथ में लेकर जमीन के ढांचे का उल्लेख किया।

ayodhyaअयोध्या भूमि विवाद (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को 40वें दिन भी सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इसे मामले की सुनवाई का आखिरी दिन करार दिया। इस दौरान मुस्लिम पक्ष और हिंदू पक्ष के बीच जबरदस्त बहस हुई। बहस इतनी ज्यादा बढ़ गई कि मुस्लिम पक्ष के वकील ने हिंदू पक्ष की तरफ से अयोध्या का एक नक्शा पेश किया तो उन्होंने इसे फाड़ दिया। वहीं कोर्ट ने कहा कि मामले में सुनवाई पूरी करने के लिए किसी भी पक्षकार को आज (बुधवार) के बाद अब और समय नहीं दिया जाएगा।

दरअसल हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह ने दलीलें पेश करते हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल की कितान ‘Ayodhya Revisited’ में छपे एक नक्शे को हाथ में लेकर जमीन के ढांचे का उल्लेख किया। इस दौरान मुस्लिम पक्ष की तरफ से वकील राजीव धवन की उनसे जमकर तकरार शुरू हो गई। यह तकरार इतनी बढ़ गई कि अंत में धवन ने नक्शे को पांच टुकड़ों में फाड़ दिया।

किताब ‘Ayodhya Revisited’ का यह नक्शा खुद किशोर कुणाल ने तैयार किया है। कुणाल ने दावा किया कि बाबर का हाथ अयोध्या स्थित राम मंदिर को तोड़ने में नहीं रहा बल्कि बाबर तो एक उदारवादी शासक था। उन्होंने कहा है कि अयोध्या में दो शिलालेख से साबित होता है कि मंदिर बाबर ने नहीं बल्कि मीर बाकी ने तुड़वाया था। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि 6 दिसंबर 1992 को जो मस्जिद ढहाई गई वह बाबरी मस्जिद नहीं थी। उन्होंने सबूतों को आधार बनाकर इस किताब में यह भी कहा है कि यह विवादित स्थल पर राम मंदिर था।

किताब में कहा गया है कि ‘मंदिर को तोड़े जाने की घटना’ 1528 ईस्वीं (बाबर के शासनकाल) में नहीं हुई थी, बल्कि यह घटना 1660 ईस्वीं में हुई जब फेदाई खान अयोध्या में औरंगजेब का गवर्नर था। कुणाल ने विवादित स्थल के उत्कीर्णन को फर्जी बताया है और यह साबित करने की कोशिश की है कि इस आधार पर कई इतिहासकारों द्वारा दिया गया निष्कर्ष गलत है। उनका कहना है, ‘यह कहना गलत है कि बाबर ने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया था। वह कभी अयोध्या नहीं आया था। इतिहासकारों का यह दावा अवास्तविक है कि अवध के गवर्नर मीर बाकी ने 1528 में बाबरी मस्जिद बनवाई थी।’

वहीं किशोर कुणाल ने नक्शा फाड़े जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि ‘वह एक बुद्धिजीवी हैं, उन्होंने सोचा कि अगर यह नक्शा अदालत के सामने पेश किया जाता है तो उनका दावा हल्का पड़ जाता। अगर उन्हें इसपर कोई आपत्ति थी तो उन्हें कोर्ट की तरफ से दिए गए समय में इसपर अपनी बात रखनी चाहिए थी।’

बता दें कि किशोर कुणाल का जन्म 12 जून 1950 में बिहार के मुजफ्फरपुर में हुआ था। वह 1972 बैच के गुजरात कैडर आईपीएस अधिकारी रहे हैं। मौजूदा समय में वह बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के प्रेसिडेंट हैं। कुणाल ने संस्कृत भाषा में पढ़ाई पूरी की है।

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