Energy Crisis in India: इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते पश्चिमी एशिया में तनाव की स्थिति है। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन से फोन पर बातचीत की। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत अपने नागरिकों और अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। पीएम मोदी के इस कथन पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सवाल खड़े किए और पूछा कि क्या देश को जल्द ही ऊर्जा संकट से छुटकारा मिलेगा या नहीं?

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “मैंने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन से क्षेत्रीय गंभीर स्थिति पर चर्चा करने के लिए बातचीत की। मैंने बढ़ते तनाव, नागरिकों की जानमाल की हानि और नागरिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की।”

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पीएम मोदी ने बताई थी भारत की प्रतिबद्धता

पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में लिखा, “भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और माल एवं ऊर्जा के निर्बाध परिवहन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। मैंने शांति एवं स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और संवाद एवं कूटनीति का आग्रह किया।”

केजरीवाल ने उठाए सवाल

प्रधानमंत्री मोदी के एक्स पोस्ट को कोट करते हुए विपक्षी आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री जी, क्या ईरान के राष्ट्रपति ने आपको आश्वासन दिया है की वो हमारे जहाजों को हॉर्मुज़ से निकलने देंगे? क्या देशवासियों को इस गंभीर संकट से जल्द छुटकारा मिलेगा?”

गौरतलब है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी एलपीजी और कच्चे तेल के संकट को लेकर सवाल खड़े किए थे। गुरुवार को राहुल गांधी ने कहा था कि पश्चिम एशिया में मौजूदा संघर्ष के कारण देश एलपीजी की कमी का सामना कर रहा है और इसके बावजूद प्रधानमंत्री लोकसभा में आकर इस मुद्दे पर बोलना नहीं चाहते।

मोदी सरकार पर हमलावर है विपक्ष

राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि अमेरिका में अडानी पर आरोप तय होने और एपस्टीन फ़ाइल्स के चलते प्रधानमंत्री मोदी घबराहट में हैं। इसके अलावा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव और गैर-बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।

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USA on Russian Oils: रूसी तेल पर अमेरिका का बदलता रुख (Photo Source: Reuters)

USA on Russian Oil: ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका का युद्ध लगातार भीषण होता जा रहा है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। कीमतों को बढ़ता देख अमेरिका ने रूसी तेल के प्रति अपनी नरमी दिखाई है। पहले अमेरिका ने दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के उपभोक्ता भारत को रूस से तेल खरीदने की 30 दिनों की अस्थायी अनुमति दी थी, कुछ वैसी ही ढील अब अमेरिका ने कई अन्य देशों को भी दी है। पढ़िए पूरी खबर…