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अटॉर्नी जनरल बोले- लोग हजारों मील चलकर आते हैं, आप उनकी बात तक नहीं सुनते, सीजेआई ने दिया जवाब

सीजेआई की अध्‍यक्षता वाली बेंच के सामने अटॉर्नी जनरल केके वेगुणोपाल ने कहा, ''आप मामला सुने बिना कह देते हैं 'डिस्‍मिस्‍ड'.... यह कोई तरीका नहीं है। अन्‍य न्‍यायालयों की प्रक्रिया देखिए...।

भारत के प्रधान न्‍यायाधीश रंजन गोगोई। (File Photo : PTI)

अटॉर्नी जनरल केके वेगुणोपाल ने सोमवार (12 नवंबर, 2018) को सुप्रीम कोर्ट की बेंच द्वारा बिना सुनवाई का पर्याप्‍त मौका दिए बिना याचिकाएं खारिज करने को लेकर असंतोष जाहिर किया। भारत के प्रधान न्‍यायाधीश रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली बेंच के सामने वेणुगोपाल ने कहा, “क्‍लाइंट्स काफी दूर से, हजारों मील का सफर तय कर आते हैं। वे पीछे खड़े होकर इस अदालत की ओर देखते हैं…उनके वकील मामला पढ़ते हैं और आप कहते हैं ‘डिस्‍मिस्‍ड’…. यह कोई तरीका नहीं है। माननीयों को उनकी बात सुननी चाहिए! बिना सुनवाई के याचिका खारिज कर देने से न्‍याय नहीं होता। यह किसी तरह से न्‍याय नहीं है। अन्‍य न्‍यायालयों की प्रक्रिया देखिए…।”

वहीं बार एंड बेंच के अनुसार, वेणुगोपाल की बात पर जस्टिस गोगोई ने जवाब देते हुए कहा, “जैसा आप कह रहे हैं, हम उसे सही भावना में लेते हैं। लेकिन यह मानकर मत चलिए कि हम तथ्‍यों पर ध्‍यान नहीं देते। हम मामला पढ़कर आते हैं।” इसके बाद सीजेआई ने अटॉर्नी जनरल को केंद्र की ओर से एक मामले में जिरह की इजाजत दे दी।

सीजेआई का पदभार संभालने के बाद से जस्टिस गोगोई ने सख्‍ती बढ़ा दी है। किसी भी मामले की तत्‍काल सुनवाई से जुड़ी व्‍यवस्‍था में सीजेआई ने बदलाव किया है। नई व्‍यवस्‍था के तहत, उनकी बेंच किसी मामले की फौरी सुनवाई तभी करेगी जब किसी की जान पर बनी होगी या अधिकारों का हनन हो रहा होगा। इसके अलावा उन्‍होंने कहा था कि वह लंबित मामलों की त्‍वरित सुनवाई के लिए एक योजना तैयार कर रहे हैं।

अदालतों में खाली पदों को भरने पर भी सीजेआई चिंता जता चुके हैं। बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा था, “अधीनस्थ न्यायालयों में रिक्तियों को भरने के मामले को देखा जाएगा। हम इसे तीन-चार महीनों के अंदर करने का प्रयास कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि “सिर्फ रिक्तियां भरने से समस्या का समाधान नहीं हो जाएगा, यह समाधान है, लेकिन समस्या का संपूर्ण समाधान नहीं है। समाधान सही लोगों के चुने जाने में है और यह तब होगा, जब पद अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखेगा।”

अपने पहले रोस्‍टर में प्रधान न्‍यायाधीश ने तय किया था कि जनहित याचिकाओं, रिट पिटीशन, सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों, चुनाव से संबंधित मामलों और संवैधानिक पदों पर नियुक्ति से जुड़े मुद्दों समेत अन्य बड़े मामलों की सुनवाई खुद करेंगे। इसके अलावा हाल ही में, सीजेआई गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे आम लोगों के लिए भी खोल दिए हैं। यानी अब सामान्‍य नागरिक भी सुप्रीम कोर्ट की इमारत में प्रवेश कर उसकी ऐतिहासिक महत्‍ता को निहार सकेंगे।

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