ताज़ा खबर
 

अटल सरकार ने भी सोचा था NRC टाइप प्लान, आधे से भी कम लोगों की ही नागरिकता तय होने से फ्लॉप हुआ पायलट प्रोजेक्ट

इसमें उम्मीद से काफी कम लोगों की ही नागरिकता साबित की जा सकी। सरकारी सूत्रों के मुताबिक "नागरिकता साबित करना एक जटिल और कठिन कार्य है।" और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के पास जरूरी "दस्तावेज़ों" की भी कमी है।

Author Edited By Sanjay Dubey नई दिल्ली | Updated: February 9, 2020 11:14 AM
नागरिकों की पहचान का रजिस्टर करना कठिन और जटिल मुद्दा है।

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) की तरह 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने भी नागरिकों को बहु-उद्देश्यीय राष्ट्रीय पहचान पत्र (MNIC) जारी करने की योजना बनाई थी। उन्होंने एक पायलट प्रोजेक्ट लांच किया था, लेकिन योजना असफल होने पर 2009 में इसे बंद कर दिया गया। इसमें उम्मीद से काफी कम लोगों की ही नागरिकता साबित की जा सकी। सरकारी सूत्रों के मुताबिक “नागरिकता साबित करना एक जटिल और कठिन कार्य है।” और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के पास जरूरी “दस्तावेज़ों” की भी कमी है।

12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चयनित 13 जिलों की लगभग 30.95 लाख की आबादी को कवर करने वाला बहु-उद्देश्यीय राष्ट्रीय पहचान पत्र (MNIC) पायलट प्रोजेक्ट नवंबर 2003 में स्वीकृत हुआ था। औपचारिक रूप से गृह मंत्रालय ने इसे अक्टूबर 2006 में लांच किया था। पायलट परियोजना आधिकारिक तौर पर 31 मार्च 2008 को पूरी हुई थी। मई 2007 से मोटे तौर पर 12 लाख से अधिक एमएनआईसी कार्ड जारी होना शुरू हुए थे। 31 मार्च 2009 को इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया।

पायलट प्रोजेक्ट की निगरानी करने वाले सचिवों की समिति के एक सदस्य ने द संडे एक्सप्रेस को बताया कि “नागरिकता एक बहुत ही जटिल और कठिन मुद्दा है।” समिति ने पाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में, विशेषकर खेतिहर मजदूर, भूमिहीन मजदूर, विवाहित महिलाएं और व्यक्ति अपनी नागरिकता साबित करने के लिए घर पर मौजूद नहीं थे। इससे इस योजना में “कमजोर दस्तावेज” बड़ी समस्या बन गई।

इस परियोजना के लिए 44.36 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई थी, जिसे बिना किसी परिणाम या डेटा को सार्वजनिक किए छोड़ दिया गया। सूत्रों ने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट की सफलता दर अभी भी 45% से कम होगी।

यूपीए सरकार ने 2011 में पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम को भी स्वीकार किया था, जब तत्कालीन राज्य मंत्री (गृह) गुरुदास कामत ने संसद को बताया था कि “पायलट प्रोजेक्ट के अनुभव से पता चला है कि नागरिकता के निर्धारण की प्रक्रिया बोझिल है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तावेज़ का आधार कमजोर है।”

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 RSS की गुड़िया इमेज से बाहर हुईं जामिया की कुलपति? दिल्ली पुलिस के खिलाफ खोला मोर्चा, यूनिवर्सिटी में छात्रों से मारपीट पर जताया रोष
2 “शाहीन बाग” के पीछे चार भाई, बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने गिनाए नाम, सबूत के सवाल पर दिया यह जवाब
3 CAA के विरोध के बीच बीजेपी विधायक का ऐलान, शरणार्थियों को गांव में बसाएंगे, 5 बीघे में बनाएंगे टू-रूम फ्लैट