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बिहार की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: कागजों में हैं 844 स्टूडेंट, पढ़ने आते हैं सिर्फ 2

वैशाली के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जिसे एक व्यापारी द्वारा चलाया जाता है वहां तो एक परिवार रह रहा था। महिला ने दरवाजा बंद करते हुए कहा कि उसकी बेटी और पति घरपर नहीं हैं।

Author July 29, 2016 2:08 PM
बिहार के बालाजी इंटर महाविद्यालय में रखी आधी-अधूरी बेंच की तस्वीर। (Express Photo: Santosh Singh)

बिहार राज्य हाल में अपने तीन टॉपर्स को लेकर सुर्खियों में रहा। ये वही टॉपर्स थे जो पेपर्स में तो टॉप कर गए लेकिन रिपोर्टर के साधारण से सवालों का भी जवाब नहीं दे पाए। उन टॉपर्स के फर्जी टॉपर होने की खबर के बाद बिशुन राय स्कूल की पोल तो खुल गई, लेकिन बिहार में मौजूद बाकी स्कूलों का क्या हाल है इसपर चर्चा नहीं हुई। ऐसे में इंडियन एक्सप्रेस ने बिहार के 25 अन्य स्कूलों में जाकर वहां तहकीकात की। इसमें पता लगा है कि बाकी स्कूलों का हाल तो बिशुन राय से भी बुरा है। किसी स्कूल में सिर्फ एक क्लासरूम था, किसी में सिर्फ दो बच्चे थे, कहीं पर क्लास ही नहीं थी तो कहीं पर टीचर और स्टूडेंट दोनों ही मौजूद नहीं थे। बिहार के जिन तीन स्टूडेंट के 12वीं में टॉप करने पर सवाल उठा था उनमें बिशुन रॉय कॉलेज की रूबी रॉय के अलावा सौरभ श्रेष्ठ और राहुल कुमार शामिल थे। रूबी राय ने इंटरव्यू में ‘पोलिटिकल सांइस’ यानी राजनीति विज्ञान को ‘प्रॉडिकल साइंस’ उच्चारित किया था और कहा था कि इस विषय में खाना बनाना सिखाया जाता है। वहीं बाकी दोनों बच्चों ने भी उल्टे जवाब दिए थे।

क्या मिला रिसर्च में: एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 25 स्कूलों में घूमने के बाद चौंकने वाले नतीजे सामने आए। उनके मुताबिक, मुजफ्फरनगर के एक स्कूल में कागजों पर 844 स्टूडेंट दिखाए गए हैं, लेकिन वहां सिर्फ दो ही बच्चे पढ़ने आए हुए थे। वहीं के दूसरे स्कूल में जाने पर पता लगा कि वहां पर जरूरी सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। उस पूरे स्कूल में सिर्फ एक ही ब्लैक बोर्ड था। मुजफ्फरनगर से 15 किलोमीटर दूर मौजूद एक स्कूल में तो कोई क्लास ही मौजूद नहीं थी। हद की बात यह थी कि यह स्कूल जेडयू के एक नेता का था।

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पनापुर के एक स्कूल में जाने पर पता लगा कि वहां 844 बच्चों के नाम दर्ज थे जिनमें से 384 आर्ट्स, 310 साइंस और 150 कॉमर्स के थे। लेकिन वहां सिर्फ दो लड़कियां ही मिलीं। प्रभातनगर में जाने पर वहां दो मंजिला की बिल्डिंग दिखी। लेकिन स्कूल की पहचान का कोई बोर्ड वहां पर नहीं था। ना ही वहां कोई बच्चा था और ना ही कोई टीचर। वैशाली के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जिसे एक व्यापारी द्वारा चलाया जाता है वहां तो एक परिवार रह रहा था। महिला ने दरवाजा बंद करते हुए कहा कि उसकी बेटी और पति घरपर नहीं हैं।

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