चीन में विकास की कीमत चुका रहे हैं हाथी

जेम्स कुक विश्वविद्यालय के विशिष्ट शोध प्रोफेसर बिल लॉरेंस के मुताबिक वयस्क मादाओं के नेतृत्व में 15 एशियाई हाथियों का एक झुंड पिछले साल म्यांमार और लाओस के साथ लगी चीन की सीमा के पास स्थित जशिुआंगबन्ना नेशनल नेचर रिजर्व से निकला था।

सांकेतिक फोटो।

जेम्स कुक विश्वविद्यालय के विशिष्ट शोध प्रोफेसर बिल लॉरेंस के मुताबिक वयस्क मादाओं के नेतृत्व में 15 एशियाई हाथियों का एक झुंड पिछले साल म्यांमार और लाओस के साथ लगी चीन की सीमा के पास स्थित जशिुआंगबन्ना नेशनल नेचर रिजर्व से निकला था। तब से उन्होंने उत्तर की ओर लगभग 500 किलोमीटर की यात्रा की है, और अब वे कुनमिंग के हलचल भरे शहर और इसके 70 लाख निवासियों के पास आ रहे हैं।

हाथी कहां जा रहे हैं और क्यों जा रहे हैं, यह कोई नहीं जानता। लेकिन दो बातें स्पष्ट हैं: हाथी शायद अपने मूल निवास में जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे थे, और हाथियों को बचाने के चीनी प्रयास देश की निवेश और वैश्विक विकास की आक्रामक रणनीतियों से टकरा रहे थे। इस पूरी यात्रा पर लाखों चीनी नागरिकों की नजर है। सरकारी प्रसारक सीसीटीवी में 24 घंटे का लाइव फीड दिखाया जा रहा है।

पहली नजर में, यह एक ऐसा परिदृश्य लगता है जो हाथियों के लिए बहुत बुरा हो सकता है। जब इनसान और यह विशाल जीव टकराते हैं, तो हाथी आमतौर पर हार जाते हैं। लेकिन भटकते हुए झुंड के लिए एक उम्मीद बनी हुई है। एशियाई हाथी चीन में कानूनी रूप से संरक्षित प्रजाति हैं। ड्रोन द्वारा सहायता प्राप्त सैकड़ों पुलिस अधिकारी इन बेखौफ जानवरों की निगरानी कर रहे हैं। हाथियों के लिए रास्ता साफ करने के लिए अब तक करीब 3,500 लोगों को अस्थायी रूप से हटाया जा चुका है।

इस तरह के प्रयास प्रशंसनीय तो हैं लेकिन गलत हैं। क्योंकि वे केवल हाथियों के विस्थापित होने वाले पर्यावरणीय दबाव की ओर इशारा करते हैं, लेकिन चीन और उसके आगे तक हाथियों से जुड़ी समस्याओं के बारे में कुछ नहीं कहते। सबसे पहले, इधर उधर घूमते हाथियों को अपने प्राकृतिक आवास केवल इसलिए छोड़ देने पड़े क्योंकि दक्षिणी चीन में उनका घर मानव विकास से तबाह हो गया। 15 साल पहले भी, जब मैंने पहली बार जÞशिुआंगबन्ना क्षेत्र का दौरा किया था, तो वहां के स्थानीय वर्षावन तबाह हो रहे थे, क्योंकि उस जमीन को रबर के विदेशी वृक्ष लगाने के लिए साफ किया जा रहा था। नतीजतन, आज पूरे चीन में लगभग 300 जंगली हाथी ही बचे हैं।

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