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लेंसेट की रिपोर्ट में दावा- डेल्टा वेरिएंट पर एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन ज्यादा कारगर नहीं

डेल्टा प्लस वेरिएंट भारत के अलावा अभी 9 देशों में पाया गया है। जबकि डेल्टा वेरिएंट भारत सहित दुनिया के 80 देशों में पाया गया। भारत में कोरोना की दूसरी लहर की वजह भी यही डेल्टा वेरिएंट ही था। भारत में डेल्टा प्लस वेरिएंट के अब तक 40 मामले सामने आ चुके हैं।

लेंसेट की रिपोर्ट में दावा- डेल्टा वेरिएंट पर एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन ज्यादा कारगर नहीं । (फोटोः द इंडियन एक्सप्रेस)

लेंसेट की एक ताजा रिपोर्ट भारत की चिंता बढ़ाने वाली है। स्कॉटलैंड में हुई एक स्टडी के हवाले से इसमें दावा किया गया है कि भारत में मिले डेल्टा वेरिएंट पर एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन ज्यादा कारगर नहीं है। भारत में ये वैक्सीन सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कोविशील्ड के नाम से बना रही है। 90 फीसदी आबादी को भारत में ये ही वैक्सीन दी जा रही है।

स्कॉटलैंड में हुई स्टडी यहां के परिपेक्ष्य में रिपोर्ट एक चिंता का सबब है। भारत में मिला वेरिएंट अब तब्दील होकर डेल्टा प्लस वेरिएंट में तब्दील हो चुका है। डेल्टा प्लस वेरिएंट को लेकर गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत में अब इसे चिंता का सबब माना जा रहा है। ये वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट से म्यूटेट होकर बना है। तकनीकी रूप से कहा जाए तो डेल्टा प्लस को B.1.617.2.1 नाम दिया गया है। डेल्टा प्लस वेरिएंट भी दो तरह के हैं। इन्हें AY.1 और AY.2 का नाम दिया गया है। इन दोनों में एक और नई म्यूटेशन भी नजर आई है जिसे AK417N नाम दिया गया है।

स्टडी में दावा किया गया कि कोविशील्ड अल्फा वेरिएंट पर जितनी कारगर है उतनी डेल्टा पर नहीं। डेल्टा भारत में ही पहली बार देखा गया जबकि अल्फा के बारे में पहली बार ब्रिटेन में जानकारी सामने आई थी।

डेल्टा प्लस वेरिएंट भारत के अलावा अभी 9 देशों में पाया गया है। जबकि डेल्टा वेरिएंट भारत सहित दुनिया के 80 देशों में पाया गया। भारत में कोरोना की दूसरी लहर की वजह भी यही डेल्टा वेरिएंट ही था। भारत में डेल्टा प्लस वेरिएंट के अब तक 40 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 21 केस अकेले महाराष्ट्र में हैं। बाकी मामले मध्य प्रदेश, केरल और कर्नाटक में है।

डेल्टा प्लस वेरिएंट से संक्रमण का पहला मामला मध्य प्रदेश में मिला था। भोपाल में एक 64 साल की महिला में इस नए वेरिएंट का पता चला था। राहत की बात ये रही कि महिला होम आइसोलेशन में ही रहते हुए पूरी तरह स्वस्थ हो गई। लेकिन एमपी के ही शिवपुरी में डेल्टा प्लस से संक्रमित चार लोगों की मौत हो गई है। केरल के दो जिलों पलक्कड़ और पथनमथिट्टा में तीन लोगों में इस नए वेरिएंट की पुष्टि हुई है। तीन लोगों में एक 4 सालका बच्चा भी शामिल है।

डेल्टा प्लस वेरिएंट को लेकर वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं और समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ये कितना खतरनाक है। इस वेरिएंट के बारे में उपलब्ध कम जानकारी ही इसे लेकर और ज्यादा खौफ पैदा कर रही है। दरअसल डेल्टा वेरिएंट ने जिस तरह से भारत में अप्रैल और मई के महीने में जबरदस्त तबाही मचाई, उसी देखते हुए आशंका है कि डेल्टा प्लस उससे कहीं ज्यादा संक्रामक और खतरनाक हो सकता है।

स्कॉटलैंड की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डेल्टा वेरिएंट में अल्फा की तुलना में मरीज के अस्पताल में दाखिल होने की संभावना दोगुनी होती है। गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों के मामले में ये खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। स्टडी के मुताबिक कोविशील्ड वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट पर ही कोई खास प्रभाव नहीं डाल पा रही है। डेल्टा प्लस के मामले में ये और कम असर करेगी।

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