ED के रडार पर हरियाणा के पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा, 10 घंटे तक पूछताछ

गुरुवार (25 जुलाई, 2019) को चंडीगढ़ स्थित ईडी दफ्तर में जांच अधिकारियों ने उनसे लगभग 10 घंटों तक पूछताछ की।

Associated Journals Limited Land Deal Case, Manesar Land Scam, Enforcement Directorate, ED, Former Haryana Chief Minister, BS Hooda, Haryana, Chandigarh, National News, Hindi News, Latest News, Jansatta Newsचंडीगढ़ स्थित ईडी दफ्तर में लगभग 10 घंटे चली पूछताछ के बाद बाहर आते पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा।

मानेसर जमीन घोटाला सिलसिले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर आ गए हैं। गुरुवार (25 जुलाई, 2019) को चंडीगढ़ स्थित ईडी दफ्तर में जांच अधिकारियों ने उनसे लगभग 10 घंटों तक पूछताछ की। इससे पहले, मंगलवार (23 जुलाई, 2019) को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर ईडी ने कांग्रेसी नेता और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। दरअसल, यह मामला पंचकूला में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) (नेशनल हेराल्ड अखबार के प्रकाशक) को आवंटित एक प्लॉट से जुड़ा है।

हुड्डा के अलावा, एजेएल के अधिकारियों, नेशनल हेराल्ड अखबार के प्रकाशक और अन्य लोगों पर आरोप है कि वह इस आवंटन से जुड़े हैं और इन सभी के नाम इनफोर्समेंट केस इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) में शामिल हैं, जो कि एफआईआर जैसी ही होती है।

दरअसल, इसी साल मई में हरियाणा स्टेट विजिलेंस ब्यूरो द्वारा किए गए आवंटन पर एक एफआईआर दर्ज हुई थी, जिस पर यह ईडी का मामला आधारित है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने एजेएल को पंचकूला के सेक्टर-6 में 3,360 स्क्वायर-मीटर के प्लॉट के आवंटन में कथित अनियमितताओं के मसले पर सबसे पहले दिसंबर 2015 में खबर प्रकाशित की थी। इस प्लॉट का आवंटन पिछली हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेसी सरकार ने 2005 में हरियाणा की सत्ता में आने के छह माह बाद किया था।

ईडी सूत्रों के मुताबिक, हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हूडा) के एक्स-ऑफिशियो चेयरमैन के नाते तब हुड्डा ने एजेएल को जमीन देकर राज्य सरकार के खजाने को लगभग 65 लाख का नुकसान पहुंचाया था। आरोप है कि तब उन्होंने न तो नियमों का पालन किया था और न ही सरकारी अधिकारियों की इस मसले पर सलाह मानी थी।

सूत्रों ने यह भी बताया था कि राज्य की ऑडिट रिपोर्ट में ये गड़बड़ियां सामने आई थीं। जिस आवंटन की निगरानी की जा रही थी, वह एजेएल के हिंदी अखबार ‘नवजीवन’ से जुड़ा था। 1982 में एजेएल को हरियाणा सरकार से प्लाट इस शर्त पर मिला था कि उसे दो सालों के भीतर उसका निर्माण पूरा कराना होगा। एक ईडी अधिकारी के मुताबिक, तब यह प्लॉट 57 लाख रुपए का खरीदा गया था।

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