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CAA Protest: असम में हजारिका- जुबिन गर्ग के गीत बने विरोध गान, कोलकाता में पुजारियों ने निकाला मार्च

प्रदर्शनकारी गर्ग ने कहा कि, ‘असम के युवा और महिलाएं सीएए के खिलाफ इस आंदोलन में हमारी बड़ी ताकत हैं और हम एक साथ विरोध के दौरान गीत गाते हैं, एक-दूसरे में ऊर्जा का संचार करते हैं।’

Author गोवाहाटी | December 31, 2019 1:21 PM
गुवाहाटीनागरिकता संशोधन बिल को लेकर असम की राजधानी गुवाहाटी में विरोध प्रदर्शन (फोटो सोर्स- एएनआई)

असम में संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में आवाज उठाने के लिए हजारों लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और अपनी बात पहुंचाने के वास्ते प्रसिद्ध संगीतकार एवं पार्श्व गायक भूपेन हजारिका तथा गायक जुबिन गर्ग की धुनों का सहारा ले रहे हैं। संशोधित नागरिकता अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान लोग हजारिका के गीत ‘बिस्वा बिजॉई नौजवान’ गा रहे हैं। इसके अलावा राज्य का एक प्रमुख गीत ‘जय आई असोम’ (असम माता की जय) इस आंदोलन का एक प्रतीक बन गया है।

संस्कृति पहचान का एक अभिन्न अंग है: गुवाहाटी के चांदमारी में एक चाय की दुकान पर या गणेशगुरी में एक पान की दुकान पर, लोगों को मोबाइल फोन पर ‘माया’ या ‘राजनीति नकोरिबा बंधु’ जैसे गर्ग के प्रसिद्ध गीतों को सुनते देखा जा सकता है। नागरिकता कानून के खिलाफ आंदोलन के सबसे मुखर चेहरों में से एक गर्ग (47) ने कहा कि संस्कृति किसी भी व्यक्ति या समुदाय की पहचान का एक अभिन्न अंग है।

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यह आंदोलन हमारी असमिया पहचान: गर्ग ने कहा कि, ‘यह आंदोलन हमारी असमिया पहचान, हमारी प्राचीन संस्कृति और परंपराओं, कपड़े, भोजन, भाषा और गीतों से प्रेरित है।’ उन्होंने कहा, ‘असम के युवा और महिलाएं सीएए के खिलाफ इस आंदोलन में हमारी बड़ी ताकत हैं और हम एक साथ विरोध के दौरान गीत गाते हैं, एक-दूसरे में ऊर्जा का संचार करते हैं।’ फिल्म निर्माता गरिमा गर्ग ने कहा कि, ‘हम अपने ही गृह राज्य में सांस्कृतिक या भाषायी अल्पसंख्यक नहीं बनना चाहते हैं। पूर्व में, असमियों पर बंगाली भाषा लागू की गई थी, और हमें डर है कि यह भविष्य में फिर से हो सकता है।’

धर्म के आधार पर देश को बांटने की कोशिश: कोलकाता शहर के मध्य में सोमवार (31 दिसंबर) को हिंदू पुजारी एकत्रित हुए और उन्होंने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के विरोध में प्रदर्शन किया। ‘‘पश्चिम बंग सनातन ब्राह्मण न्यास’’ के बैनर तले लगभग सौ पुजारी मेयो रोड पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के आसपास एकत्रित हुए और उन्होंने सीएए और एनआरसी के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने राज्य में विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद शांति बहाली की मांग की। न्यास के महासचिव श्रीधर मिश्र ने कहा, ‘यह बेहद चिंताजनक है कि धर्म के आधार पर देश को बांटने की कोशिश की जा रही है। सीएए और एनआरसी का लक्ष्य एक विशेष समुदाय के लोगों को अलग-थलग करना है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।’

सरकार को विपक्ष की बात सुननी चाहिए: जगद्गुरू स्वामी अधोक्षजानंद ने सोमवार (30 दिसंबर) को कहा कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) से नि:संदेह इस देश में हलचल हुई है और अव्यवस्था की स्थिति बनी है लेकिन ऐसे में विपक्ष केवल विरोध के लिए विरोध न करे, बल्कि देश की सबसे बड़ी पंचायत में अपना पक्ष रखे। माघ मेला प्रारंभ होने से पूर्व यहां मेला क्षेत्र स्थित त्रिवेणी मार्ग पर लगने वाले शिविर के लिए भूमि पूजन के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘देश में जो स्थिति है उससे मुझे लगता है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही गैर जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहे हैं।’ स्वामी अधोक्षजानंद ने कहा, ‘सरकार को चाहिए कि जो देश में हो रहा है उसे सुना जाए और विपक्ष क्या कह रहा है, उसकी बात भी सुनी जाए क्योंकि विपक्ष के लोग भी जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि होते हैं।’

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