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असम के सीएम बोले,…तो मुझे मुख्यमंत्री बने रहने का कोई हक नहीं

7 से 9 मई के बीच संयुक्त संसदीय समिति ने ब्रह्मपुत्र घाटी के कुछ जिलों और बराक घाटी के कुछ जिलों में जाकर व्यक्तियों, राजनीतिक और अन्य संगठनों से इस विधेयक पर राय ली थी। 16 सदस्यीय इस संसदीय समिति के अध्यक्ष भाजपा नेता राजेंद्र अग्रवाल हैं।

असम के मुख्‍यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल

असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल ने कह है कि अगर वो राज्य के लोगों के हितों की रक्षा नहीं कर सकते तो मुख्यमंत्री बने रहने का उन्हें कोई हक नहीं है। दरअसल केंद्र सरकार 1955 के नागरिकता अधिनियम में कुछ बदलाव करना चाहती है। सरकार द्वारा प्रस्तावित किए गए नए नागरिकता (संशोधन) बिल 2016 का असम के अलग -अलग क्षेत्रों में विरोध हो रहा है। प्रस्तावित बिल पर संयुक्त संसदीय समिति ने हाल ही में असम में जन संवाद कर लोगों से उनकी राय भी ली है। समिति के इस जन संवाद के बाद मुख्यमंत्री ने यह बात कही है।

क्या है प्रस्तावित नागरिकता संशोधन बिल? दरअसल यह विधेयक 1955 के नागरिकता अधिनियम में बदलाव के लिए लाया गया है। प्रस्तावित नागरिकता (संशोधन) विधेयक में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, जैन, ईसाई, पारसी और बौद्ध धर्म के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान शामिल है। विधेयक के मुताबिक विदेश से आए शरणार्थियों को लिए भारतीय नागरिकता पाने की अवधि को 11 साल से घटाकर 6 साल कर दिया गया है। यानी यह शरणार्थी 6 साल तक यहां रहने के बाद भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।

क्यो हैं विवाद? 7 से 9 मई के बीच संयुक्त संसदीय समिति ने ब्रह्मपुत्र घाटी के कुछ जिलों और बराक घाटी के कुछ जिलों में जाकर व्यक्तियों, राजनीतिक और अन्य संगठनों से इस विधेयक पर राय ली थी। 16 सदस्यीय इस संसदीय समिति के अध्यक्ष भाजपा नेता राजेंद्र अग्रवाल हैं।

इस दौरान कई लोगों ने इस प्रस्तावित बिल के विरोध में यहां प्रदर्शन भी किया था। इन लोगों का आरोप था कि यह बिल असम समझौते के खिलाफ है। बता दें कि ब्रह्मपुत्र घाटी के लोग इस बिल का विरोध करते हैं जबकि बराक घाटी के लोग इस बिल के समर्थन में हैं। बराक घाटी में बांग्लादेशियों की संख्या काफी ज्यादा है। पीटीआई के मुताबिक यहां भारी संख्या में लोगों ने इस विधेयक का समर्थन किया है। असम से बांग्लादेश का बॉर्डर काफी सटा हुआ है। प्रवासियों के मुद्दे पर कई बार राज्य में हिंसा भी हो चुकी है। हालांकि अभी संयुक्त संसदीय समिति ने इसपर कुछ फैसला नहीं दिया है।

क्या कहा सीएम ने? संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के इस बिल पर जन संवाद के बाद राज्य के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल ने कहा है कि हमारा उद्देश्य लोगों के बीच एकता को बनाए रखा है, चाहे इसके लिए त्याग ही क्यों ना करना पड़े। उन्होंने कहा है कि वो इस मुद्दे पर वरिष्ठ नागरिकों और बुद्धिजीवियों से भी विचार-विमर्श करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि अगर मैं अपने लोगों के हितों की रक्षा नहीं कर सकता, तो मेरे मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है।

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