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असम में छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का विरोध

असम के आदिवासी संगठनों की समिति (सीसीटीओए) ने छह समुदायों के लिए अच्छे दिन आ रहे हैं, लेकिन 14 समुदायों के लिए बुरे दिन होंगे।

Author गुवाहाटी | August 23, 2016 5:43 AM
असम (Photo: Google Map)

असम में छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के केंद्र के फैसले का विरोध करते हुए 16 आदिवासी संगठनों ने सोमवार को बंद बुलाने और राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम करने समेत कई आंदोलन कार्यक्रमों की घोषणा की। असम के आदिवासी संगठनों की समन्वय समिति (सीसीटीओए) ने यहां राष्ट्रीय सम्मेलन किया। सम्मेलन में उन्होंने बेमियादी असम बंद और राष्ट्रीय राजमार्गों व रेल मार्गों को अवरुद्ध करने का आह्वान करने समेत विभिन्न तरह से विरोध प्रदर्शन करने फैसला किया है। सीसीटीओए के समन्वयक प्रमोद बोरो ने सम्मेलन में कहा, ‘अगर छह समुदाय जो मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं, उन्हें प्रस्तावित आरक्षण दिया गया तो मौजूदा 14 अनुसूचित जनजातियां और पिछड़ी हो जाएंगी।’ उन्होंने कहा कि संगठन ने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से अपील की कि वे मौजूदा समुदायों के साथ द्विपक्षीय बैठक करें लेकिन कुछ भी नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘2014 में हमने भी (नरेंद्र) मोदी का अच्छे दिन के लिए समर्थन किया। छह समुदायों के लिए अच्छे दिन आ रहे हैं, लेकिन 14 समुदायों के लिए बुरे दिन होंगे।’ बोरो, ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि मोरान, मुटॉक, ताई-अहोम, कोच-राजबोंगशी, सूटिया और चाय जनजातियां 2011 की जनगणना के मुताबिक, असम की कुल आबादी का 56 फीसद हैं। उन्होंने कहा, ‘ये समुदाय हिंदू जाति प्रणाली का पालन कर रहे हैं और उन्हें ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ या ‘अति अन्य पिछड़ा वर्ग’ का दर्जा सही दिया गया है। वे आदिवासियों का गुण नहीं रखते हैं।’

14 अनुसूचित जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी 16 समूहों ने एक संयुक्त प्रस्ताव में कहा कि अगर छह समुदायों को उनके साथ सूची में शामिल किया गया तो मौजूदा वास्तविक अनुसूचित जनजातियों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व समाप्त हो जाएगा। प्रस्ताव में कहा गया है, ‘राष्ट्रीय सम्मेलन ने सर्वसम्मति से छह अगड़ी और अच्छी आबादी वाले समुदायों को असम की अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के सरकार के नुकसानदेह राजनीतिक कदम का विरोध करने का फैसला किया है।’ अगर केंद्र और राज्य सरकार इस दिशा में बढ़ती हैं तो समूहों ने कानूनी रास्ता अख्तियार करने और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रिट दायर करने का फैसला किया है।

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘राष्ट्रीय सम्मेलन में छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की स्थिति में जागरूकता अभियान चलाने और राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम करने, रेल नाकेबंदी और बेमियादी असम बंद समेत विभिन्न लोकतांत्रिक जनांदोलन शुरू करने का भी फैसला किया है।’

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