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CJI रंजन गोगोई की सुरक्षा में बरती कोताही, असम के वरिष्ठ IPS अफसर सस्पेंड

भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की कामाख्या मंदिर की हाल की यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कोताही बरतने को लेकर असम के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पर गाज गिरी है। गुवाहाटी पश्चिम के पुलिस उपायुक्त को निलंबित कर दिया।

Author Updated: October 21, 2018 6:29 PM
Ranjan Gogoi, CJIभारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की कामाख्या मंदिर की हाल की यात्रा के दौरान उनकी उचित सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करने के लिए असम सरकार ने शनिवार (20 अक्टूबर) को गुवाहाटी पश्चिम के पुलिस उपायुक्त को निलंबित कर दिया। गृह विभाग द्वारा राज्यपाल के नाम पर जारी आदेश के मुताबिक अखिल भारतीय सेवा नियम 1969 के नियम 3 (1) के तहत भंवर लाल मीणा को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आदेश पर गृह विभाग के सचिव दीपक मजूमदार के हस्ताक्षर हैं। दरअसल, सीजेआई गोगोई और उनकी पत्नी 17 अक्टूबर को गुवाहाटी आए थे और उनके कार्यक्रम के बारे में सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी संबंधित महकमों को सूचित किया था। आदेश में कहा गया है कि कामाख्या मंदिर में सीजेआई के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई जिस वजह से उन्हें असुविधा हुई।

बता दें कि न्यायिक प्रक्रिया और कार्यवाही के संदर्भ में एक सख्त न्यायाधीश के तौर पर पहचान रखने वाले न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने इसी महीने की 3 तरीख को को देश के 46वें प्रधान न्यायाधीश का पदभार संभाल लिया था। वे पूर्वोत्तर से न्यायपालिका के इस शीर्ष पद पर पहुंचने वाली पहली हस्ती हैं। असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी और लोकपाल कानून के तहत लोकपाल संस्था की स्थापना जैसे विषयों पर सख्त रूख अपनाने वाले न्यायमूर्ति गोगोई 17 नवंबर 2019 को सेवानिवृत्त होने तक करीब 13 महीने देश के प्रधान न्यायाधीश रहेंगे।

न्यायमूर्ति गोगोई तब सुर्खियों में आए थे जब निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की कार्यशैली को लेकर 12 जनवरी 2018 को न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर के नेतृत्व में चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स की थी। इन चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति गोगोई भी शामिल थे। इस प्रेस कॉन्फ्रेन्स में न्यायाधीशों ने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश पर कई आरोप लगाये थे। इसके साथ ही केरल में फरवरी, 2011 में एक ट्रेन में हुये सनसनीखेज सौम्या बलात्कार और हत्या के मामले में शीर्ष अदालत के निर्णय से असहमति व्यक्त करते हुये पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ने तब सोशल मीडिया पर तल्ख़ टिप्पणियां कीं थीं। इसे लेकर न्यायमूर्ति गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने 11 नवंबर, 2016 को पूर्व सहयोगी न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू को अवमानना का नोटिस जारी करके सनसनी पैदा कर दी थी।

असम के डिब्रूगढ़ में 18 नवंबर, 1954 को जन्मे रंजन गोगोई ने 1978 में वकालत शुरू की और 28 फरवरी, 2001 को उन्हें गौहाटी उच्च न्यायालय का स्थाई न्यायाधीश बनाया गया। इसके बाद नौ सितंबर, 2010 का उनका तबादला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में किया गया और 12 फरवरी, 2011 को उन्हें इसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। न्यायमूर्ति गोगोई की 23 अप्रैल, 2012 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर पदोन्नति हुई थी। असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई के पुत्र न्यायमूर्ति गोगोई ने असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी, सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन, राजीव गांधी हत्याकांड मामले के दोषियों को उम्र कैद की सजा से छूट तथा लोकपाल जैसे महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं।

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