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NRC लिस्‍‍‍ट में नाम नहीं: पिता थे स्‍वतंत्रता सेनानी, खुद असम आंदोलन में रहे थे शामिल, अब सरकार मान रही ‘विदेशी’

62 वर्षीय बोरदोलोई का कहना है कि 'उन्होंने अपनी जिन्दगी असम आंदोलन को समर्पित कर दी थी। मैं इसके चलते जिला जेल में भी एक हफ्ते तक बंद रहा। हम फेयर एनआरसी के लिए लड़े, लेकिन यह दुखद है कि अब मुझे ही इसकी वजह से परेशानी उठानी पड़ रही है।'

Author नई दिल्ली | Published on: July 10, 2019 2:40 PM
assam nrcप्रदीप बोरदोलोई और उनकी पत्नी।

असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (NRC) का फाइनल ड्राफ्ट आगामी 31 जुलाई को पब्लिश किया जाएगा। हालांकि जब से असम में एनआरसी लागू हुआ है और जब से इसका पहला ड्राफ्ट जारी हुआ है, इसके बाद से ही इसे लेकर विवाद जारी है। कई लोगों का कहना है कि वह लंबे समय से असम के नागरिक हैं, लेकिन उनका नाम एनआरसी की लिस्ट से बाहर है! प्रदीप बोरदोलोई का मामला भी ऐसा ही है।
बता दें कि असम के मोरीगांव जिले के चरायबाही इलाके में रहने वाले प्रदीप बोरदोलोई के पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्होंने खुद ने साल 1979 से लेकर 1985 तक चले असम आंदोलन में हिस्सा लिया था, लेकिन अब उनका नाम ही एनआरसी की लिस्ट से गायब है।

62 वर्षीय बोरदोलोई का कहना है कि ‘उन्होंने अपनी जिन्दगी असम आंदोलन को समर्पित कर दी थी। मैं इसके चलते जिला जेल में भी एक हफ्ते तक बंद रहा। हम फेयर एनआरसी के लिए लड़े, लेकिन यह दुखद है कि अब मुझे ही इसकी वजह से परेशानी उठानी पड़ रही है।’ बोरदोलोई के साथ ही उनकी पत्नी पिंकूमोनी (46 वर्ष) और दो बच्चों के नाम भी एनआरसी लिस्ट से गायब हैं।

प्रदीप बोरदोलोई ने बताया कि जब वह एनआरसी सेवा केन्द्र गए तो उन्हें बताया गया कि उनके दस्तावेज सही हैं और उन्हें घबराने की कोई जरुरत नहीं है। लेकिन 30 जुलाई, 2018 को जारी हुई एनआरसी की लिस्ट में बोरदोलोई परिवार का नाम नहीं है। प्रदीप का कहना है कि उसके बाद से ही वह एनआरसी सेवा केन्द्रों के चक्कर लगा रहे हैं। जहां अधिकारियों द्वारा उन्हें बताया जा रहा है कि उनके दस्तावेज सही हैं और उनकी समस्या दूर हो जाएगी।

बोरदोलोई को शक है कि उन्होंने साइबर कैफे से ऑनलाइन एनआरसी के लिए अप्लाई किया था, ऐसे में हो सकता है कि वहीं से कुछ गड़बड़ हुई है। बोरदोलोई के अनुसार, ‘सभी चाहते हैं कि एनआरसी निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से लागू हो, लेकिन जिस दिशा में चीजें जा रही हैं, उन्हें देखकर लगता है कि इसमें भारी लापरवाही बरती जा रही है।’

बता दें कि बीते साल 30 जुलाई को एनआरसी की पहली लिस्ट जारी की गई थी। जिसमें 40 लाख लोगों को एनआरसी में जगह नहीं मिली थी। उसके बाद बीते जून में इस लिस्ट में से एक लाख से भी ज्यादा नामों को ड्रॉप कर दिया गया था। इस तरह राज्य में करीब 42 लाख लोगों के नाम अब एनआरसी की लिस्ट से बाहर हैं। ऐसे में सभी की निगाहें 31 जुलाई को जारी होने वाली एनआरसी की फाइनल लिस्ट पर लगी हैं।

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