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Assam NRC: ULFA प्रमुख परेश बरुआ का नाम शाम‍िल, पूर्व राष्‍ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के भतीजे का नहीं

Assam NRC: उल्फा एक उग्रवादी संगठन है, जो स्वायत्त असम के लिए सशस्त्र आंदोलन में सक्रिय रहा है। बरुआ इसी के कारण म्यांमार से लेकर चीन तक भागकर और छिप-छिपाकर रह चुके हैं।

उग्रवादी संगठन उल्फा के प्रमुख परेश बरुआ। (फाइल फोटो)

असम में सोमवार (30 जुलाई) को जारी हुए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के अंतिम ड्राफ्ट में यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के प्रमुख परेश बरुआ का नाम पाया गया। मगर उनकी पत्नी बॉबी भुयन और दो बेटों (अरिंदम और आकाश) के नाम इस सूची में गायब हैं। उल्फा प्रमुख का नाम इससे पहले 31 दिसंबर 2017 को जारी हो चुके पहले ड्राफ्ट में भी सामने आया था। बता दें कि उल्फा एक उग्रवादी संगठन है, जो स्वायत्त असम के लिए सशस्त्र आंदोलन में सक्रिय रहा है। बरुआ इसी के कारण म्यांमार से लेकर चीन तक भागकर और छिप-छिपाकर रह चुके हैं।

असम में जारी हुए एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट में इसके अलावा दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के भतीजे का नाम मिसिंग है, जिसका नाम जियाउद्दीन है। वह फखरुद्दीन के भाई इकरामुद्दीन अली अहमद के बेटे हैं। वे असम के कामरूप जिले के रंगिया इलाके के रहने वाले हैं। एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट में नाम गायब पाने पर पूर्व राष्ट्रपति के भाईका परिवार हैरान रह गया। परिजन का कहना है कि वे लोग दस्तावेज ढूंढेंगे, जिसके आधार पर वे एनआरसी सूची में अपने नाम दर्ज कराने का दावा पेश कर सकेंगे।

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बकौल जियाउद्दीन, “मैं पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद का भतीजा हूं। मेरा नाम एनआरसी से गायब है। चूंकि मेरे पिता का नाम डेटा में नहीं है, लिहाजा हम थोड़ा सा चकित हैं।” वहीं, सोमवार को रजिस्ट्रार जनरल एंड कन्सेंसेस कमिश्नर शैलेश ने बताया कि जिन लोगों का नाम एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट में नहीं है, उन्हें अपने नाम सूची में दर्ज कराने के लिए व्यक्तिगत तौर पर चिट्ठी भेजी जाएगी।

उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियम-कानून का पूरा पालन किया गया है। जिनके नाम नहीं है, उन्हें भी अपना दावा पेश करने का मौका मिलेगा। रजिस्ट्रार जनरल ने इस बात पर जोर देते हुए साफ किया कि यह अंतिम सूची नहीं है। राज्य से मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी लोगों से अपील की थी कि अगर उनके नाम सूची में न हों तो वे परेशान न हों।

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