केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को जनसंख्या अनुपात में बदलाव (डेमोग्राफी चेंज) की समीक्षा करने के लिए विशेष समिति की घोषणा की। बुधवार को इस समिति की अधिसूचना भी जारी कर दी गयी। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नावलेकर को चार सदस्यीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह समिति एक साल में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। समिति अपनी रिपोर्ट में जनसंख्या में अप्राकृतिक बदलाव के कारणों की पड़ताल करेगी और इसके लिए जिम्मेदार कारकों के समाधान भी सुझाएगी।
हालिया पश्चिम बंगाल और असम विधान सभा चुनाव के दौरान भी डेमोग्राफी चेंज का मुद्दा प्रमुखता से उठा। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सर्मा ने दावा किया कि “10 साल में राज्य में हिंदू अल्पसंख्यक बन जाएंगे और मुस्लिम राज्य का सीएम तय करेंगे।”
भारत विभाजन के बाद असम की डेमोग्राफी
वर्ष 1947 में भारत विभाजन के बाद पहली बार 1951 में जनगणना हुई। पहली जनगणना में असम में मुस्लिम आबादी करीब 24.7 प्रतिशत थी। वहीं हिंदू आबादी 70.78 प्रतिशत थी।
हिस्सेदारी
हिस्सेदारी
60 वर्षों में वृद्धि
सर्वाधिक दशकीय दर
औसत वृद्धि दर
| वर्ष | मुस्लिम हिस्सेदारी | डेटा प्रकार | दशकीय वृद्धि दर |
|---|---|---|---|
| 1951 | 24.70% | जनगणना | — |
| 1961 | 23.29% | जनगणना | -5.70% |
| 1971 | 24.56% | जनगणना | +5.45% |
| 1991 | 28.43% | जनगणना | +7.88% (औसत) |
| 2001 | 30.92% | जनगणना | +8.76% |
| 2011 | 34.22% | जनगणना | +10.67% |
| 2021 | 37.87% | अनुमानित | +10.67% |
| 2031 | 41.91% | अनुमानित | +10.67% |
| 2041 | 46.38% | अनुमानित | +10.67% |
| 2048-49 | 50%+ | अनुमानित | — |
1971 की जनगणना में असम की डेमोग्राफी
वर्ष 1971 की जनगणना में असम के डेमोग्राफी अनुपात में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। जनगणना के अनुसार राज्य में मुस्लिम आबादी करीब 24.56 प्रतिशत और हिन्दू आबादी 72.51 प्रतिशत थी।
1981 की जनगणना में असम को शामिल नहीं किया गया था क्योंकि राज्य में हालात अशांत थे। इसके बाद 1991 की जनगणना में असम में मुस्लिम आबादी करीब 28.43 प्रतिशत थी। यदि 1961 की जनगणना से तुलना करें तो राज्य में मुस्लिम जनसंख्या में करीब 7.88 प्रतिशत प्रति दशक की बढ़ोतरी हुई।
2001 की जनगणना के अनुसार असम में मुस्लिम आबादी 30.92 प्रतिशत थी। यदि 1981 से तुलना करें तो मुस्लिम आबादी की दशकीय वृद्धि दर 8.76 प्रतिशत रही।
साल 2011 में हुई जनगणना के दौरान असम की मुस्लिम आबादी 34.22 प्रतिशत, हिंदू आबादी 61.46 और ईसाई 3.7 प्रतिशत थी।
2001 से लेकर 2011 तक असम में मुस्लिम आबादी की दशकीय वृद्धि दर करीब 10.67 प्रतिशत रही। कोरोना महामारी के कारण 2021 में प्रस्तावित जनगणना नहीं हो सकी। केंद्र सरकार ने इस साल जनगणना की अधिसूचना जारी की जो साल 2027 तक पूरी होगी। नई जनगणना रिपोर्ट आने का अनुमान है।
अब तक के आंकड़े बताते हैं कि 1971 से लेकर 2011 तक असम में मुस्लिम आबादी की दशकीय वृद्धि दर हर जनगणना के साथ बढ़ती गयी है। यदि हम असम में मुस्लिम आबादी की पिछली वृद्धि दर को वर्तमान दर मान लें तो अनुमान लगा सकते हैं कि अगले दशक में मुस्लिम आबादी में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है। हालाँकि जनसंख्या वृद्धि दर घटने या बढ़ने पर अंतिम अनुमान उसी अनुपात में बदलेगा।
आगामी जनगणना में असम की डेमोग्राफी
जारी जनगणना के आंकड़े अगले वर्ष आने का अनुमान है। यदि साल 2001 से 2011 तक की वृद्धि दर बरकरार रही तो चालू जनगणना में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत 40.24 रहने का अनुमान है।
यदि अगली जनगणना दस साल बाद 2037 में होती है तो मुस्लिम आबादी का अनुपात 44.52 प्रतिशत हो सकता है।
उसके बाद 2047 की जनगणना में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत 49.31 हो जाएगा।
यानी असम में मुस्लिम जनसंख्या की वर्तमान विकास दर बरकरार रही तो राज्य में 2047 तक राज्य में मुस्लिम आबादी हिंदुओं से ज्यादा हो जाएगी। राज्य में फिलहाल करीब तीन प्रतिशत ईसाई हैं।
मुस्लिम आबादी ज्यादा तेजी से बढ़ने के कारण
किसी समुदाय की आबादी की वृद्धि को सकल प्रजनन दर (TFR) से मापा जाता है। यदि किसी समुदाय का टीएफआर 2.1 है तो उसकी जनसंख्या स्थिर रहेगी। इसे रिप्लेसमेंट रेट कहा जाता है यानी इस दर वृद्धि होगी तो जनसंख्या लगभग उतनी ही बनी रहेगी। रिप्लेसमेंट रेट से ज्यादा या कम दर रहने पर समुदाय की आबादी उसी के अनुपात में घटती या बढ़ती है।
साल 2020 के राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार भारत में हिन्दू समुदाय की प्रजनन दर 1.9 और मुस्लिम की 2.3 है।
NFHS- 5 के अनुसार असम में मुसलमानों का प्रजनन दर 2.4 है जबकि हिंदुओं में यह दर 1.6 और ईसाइयों में 1.5 है। यानी राज्य में मुस्लिम आबादी का अनुपात बढ़ रहा है और हिन्दू और ईसाई आबादी का अनुपात कम हो रहा है।
हालाँकि केवल उच्च प्रजनन दर की वजह से असम की मुस्लिम आबादी का अनुपात नहीं बढ़ा है। मुस्लिम आबादी के उच्च प्रजनन दर को ध्यान में रखें तो भी असम की मुस्लिम आबादी की बढ़ोतरी तर्कसंगत नहीं है। कई जानकार मानते हैं कि भारत के सीमावर्ती राज्यों (असम और पश्चिम बंगाल) में मुस्लिम आबादी के ज्यादा तेजी से बढ़ने का एक प्रमुख कारण घुसपैठ भी है।
बांग्लादेश और म्यांमार से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वालों की वजह इन राज्यों में आबादी में अप्राकृतिक रूप से बढ़ोतरी हुई है।
भारत के किन राज्यों-यूटी में हिंदू अल्पसंख्यक हैं
वर्तमान में छह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। लद्दाख, मिजोरम, लक्षद्वीप, जम्मू कश्मीर, नागालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में हिंदू अल्पसंख्यक है।
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अब डेमोग्राफी चेंज के जब आरोप लगते हैं तब सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की होती है कि आखिर देश में मुस्लिम आबादी कितनी ज्यादा बढ़ चुकी है।पढ़ें पूरी खबर
