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असम: मुस्लिम से शादी करने वाली हिंदू महिला ने की आत्महत्या, कब्रिस्तान-श्मशान दोनों में नहीं मिली जगह, दो दिन पड़ा रहा शव

दोनों धर्मों के अंतिम संस्कार स्थल पर जगह मिलने के बाद तुलसी दास का शव रविवार (दो जुलाई) को पुलिस थाने में रहा।

इस तस्वीर का इस्तेमाल खबर की प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (File Photo/PTI)

असम के तिनसुकिया जिले की एक हिन्दू महिला ने भाग कर मार्घेरिटा कस्बा निवासी एक मुस्लिम से शादी कर ली थी। शनिवार ( एक जुलाई) को महिला ने आत्महत्या कर ली। उसकी मौत के बाद स्थानीय कब्रिस्तान और श्मशान दोनों ने ही महिला के अंतिम संस्कार के लिए जगह देने से इनकार कर दिया। सोमवार (तीन जुलाई) को पुलिस ने मामले में दखल देते हुए महिला के माता-पिता की मदद की और उसका हिन्दू रीति-रिवाज से दाह-संस्कार हुआ। 23 वर्षीय तुलसी दास तिनसुकिया के परबतिया की रहने वाली थीं। कथित तौर पर वो करीब एक महीने पहले 27 वर्षीय बिट्टू अली के साथ भाग गई थीं। तिनसुकिया के पुलिस एसपी मुग्धाज्योति देव महंता के अनुसार शनिवार को जब बिट्टू अली तुलसी दास का शव लेकर कब्रिस्तान गए तो उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया।

पुलिस एसपी के अनुसार कब्रिस्तान में प्रवेश न मिलने पर बिट्टू अली तुलसी दास का शव लेकर श्मशान स्थल गे लेकिन वहां भी उन्हें प्रवेश नहीं मिला क्योंकि दास ने एक मुसलमान से शादी की थी। एसपी महंता ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “खबर के अनुसार कुछ लोगों ने अपनी बीवी का शव हिन्दू श्मशान में ले जाने की कोशिश करने पर अली के साथ मारपीट भी की लेकिन इसकी कोई आधिकारिक शिकायत हमें नहीं मिली है।”

दोनों धर्मों के अंतिम संस्कार स्थल पर जगह मिलने के बाद तुलसी दास का शव रविवार (दो जुलाई) को पुलिस थाने में रहा। सोमवार को एसपी महंता ने शव तुलसी दास के माता-पिता के पास भिजवाया। तुलसी के माता-पिता ने शव को स्वीकार करते हुए उनका दाह-संस्कार कराया।  एसपी महंता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “तिनसुकिया के हिन्दू समुदाय ने भी दाह-संस्कार ने भी इसकी अनुमति दी थी।”

एसपी महंता ने कहा, “हमें नहीं लगता है कि महिला ने पति-पत्नी में झगड़ा होने की वजह से आत्महत्या की होगी। अली के अनुसार उनके बीच कोई झगड़ा नहीं हुआ था। तुलसी के माता-पिता ने कोई शिकायत या संदेह नहीं जताया है।” पुलिस के अनुसार तुलसी दास के शव को पोस्टमार्टम हो चुका है पर अंतिम रिपोर्ट आनी बाकी है।

मार्घेरिटा गुवाहाटी से करीब 520 किलोमीटर दूर है। इस ऐतिहासिक कस्बे में कोयले की खोज के बाद 1880 के दशक में पेट्रोलियम की खोज हुई थी। 1884 में जब तो इतालवी इंजीनियरों ने डिब्रुगढ़ से मार्घेरिटा के बीच असम की पहली रेल पटरी लगवाई उसके बाद  इस कस्बे का नाम इटली की रानी मार्घेरिटा मारिया टेरेजा जियोवानी के नाम पर रखा दिया गया।

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