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गुवाहाटी मेयर का आदेश: कर्मचारी सुबह 10 बजे ‘जन-गण-मन’ गाकर करें काम की शुरुआत

गुवाहाटी से पहले जयपुर नगर निगम ने अपने कर्मचारियों के लिए राष्ट्रगान और राष्ट्रगीन गाना अनिवार्य किया था।

गुवाहाटी नगर निगम के कर्मचारी राष्ट्रगान गाते हुए। (Photo Source: ANI)

गुवाहाटी मेयर ने नगर निगम के सभी कर्मचारियों को अपने काम की शुरुआत हर सुबह 10 बजे राष्ट्रगान गाकर करने के निर्देश दिए हैं। गुवाहाटी के मेयर मृगेन सरानिया ने कहा, ‘हमारी ड्यूटी है कि हम नागरिकों को उनकी ड्यूटी के प्रति जागरूक करें और देश के प्रति उनमें सम्मान पैदा करें। इसलिए हमने आज से यह करने का फैसला किया है।’ बता दें, ऐसा ही आदेश कुछ दिन पहले जयपुर नगर निगम ने दिया था। जयपुर नगर निगम ने सभी कर्मचारियों को निर्देश दिए थे कि सुबह काम की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ करें और शाम को ऑफिस से जाते वक्त राष्ट्रगीत गाएं। जयपुर नगर निगम ने एक सर्कूलर जारी करके इसे सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य कर दिया था। जयपुर नगर निगम का कहना है कि इससे निगम के कर्मचारियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और देशभक्ति की भावना जगेगी।

जयपुर नगर निगम के इस फैसले के बाद जयपुर के मेयर अशोक लाहोटी ने कहा था कि जिन्हें राष्ट्रगान से दिक्कत है, वह पाकिस्तान जाएं। मेयर लाहोटी ने कहा था, ‘जिस देश में रहते हो, उस देश के राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का भी विरोध करना है, बिल्कुल करें, इसके लिए कोई मना नहीं है। फिर पाकिस्तान में जाएं। मैं अगर नगर निगम का काम कर रहा हूं और नगर निगम का विरोध करूं तो इसका कोई औचित्य नहीं है।’ हालांकि, बाद में लाहोटी अपने बयान से मुकर गए थे। जयपुर नगर निगम के निर्देश के मुताबिक सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को 9.50 बजे राष्ट्रगान और शाम 5.55 बजे राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य कर दिया गया। सुबह राष्ट्रगान गाए जाने के बाद उपस्थिति के लिए बॉयो मैट्रिक मशीन काम करना बंद कर देगी।

इसके बाद खबरें आई थीं कि जयपुर नगर निगम की तर्ज पर भोपाल नगर निगम में भी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए रोज सुबह राष्ट्रगान और शाम को राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य किया जा सकता है। जल्द ही इस संबंध में नगर निगम परिषद की बैठक में प्रस्ताव पेश किया जाएगा। भोपाल के महापौर आलोक शर्मा ने मंगलवार को पीटीआई को बताया था, ”हम इस मामले में जयपुर नगर निगम द्वारा की गई पहल का स्वागत करते हैं। इसे हम यहां लागू करने के बारे में विचार कर रहे हैं। इस पर पार्षदों व महापौर परिषद से चर्चा कर नगर निगम परिषद की बैठक में प्रस्ताव पेश किया जाएगा और परिषद की मंजूरी के बाद इसे निगम के सभी कार्यालयों में लागू किया जाएगा।”

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