Elephant Retirements in Assam: असम के वन विभाग से दिल छू लेने वाली खबर सामने आई है। मानस नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व में अपनी लंबी और समर्पित सेवाएं देने के बाद दो बुजुर्ग हाथी, ‘प्रमिला’ और ‘पूर्णिमा’, अधिकारिक तौर पर सेवानिवृत्त (रिटायर) हो गए हैं।

इस खास मौके पर वन विभाग ने दोनों हाथियों के लिए एक भव्य और औपचारिक विदाई समारोह का आयोजन किया, जहां उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर सम्मानित किया गया। इस विदाई के साथ ही जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण को मजबूत बनाए रखने के लिए पांच नए प्रशिक्षित हाथियों को भी रिजर्व की सेवा में शामिल किया गया है।

सीएम हिमंता बोले- सभी हीरो वर्दी नहीं पहनते

हाथियों के रिटायरमेंट को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (ट्विटर) पर इस भावुक और गर्व के पल को साझा किया। उन्होंने लिखा, “सभी हीरो वर्दी नहीं पहनते। कुछ जंगलों में चलते हैं। आज मानस टाइगर रिजर्व ने वयोवृद्ध हाथी प्रमिला और पूर्णिमा को वन्यजीव संरक्षण में उनके सालों के समर्पित सेवाकाल के लिए ‘गार्ड ऑफ ऑनर’, पारंपरिक गमोचा और एक औपचारिक विदाई देकर सम्मानित किया।”

मुख्यमंत्री ने आगे जोड़ा कि जहां एक तरफ ये दोनों हाथी सम्मान के साथ रिटायर हो रहे हैं। वहीं पांच नए प्रशिक्षित हाथी हमारे जंगलों और वन्यजीवों की सेवा में अपनी नई यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं।

हाथियों की हुई सराहना

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार वन विभाग के कर्मियों ने मानस नेशनल पार्क में वन्यजीव संरक्षण, शिकार विरोधी अभियानों आवास प्रबंधन, बचाव अभियानों और इको-टूरिज्म गतिविधियों में इन कैंप हाथियों के अमूल्य योगदान की जमकर सराहना की।

इस विदाई समारोह को बेहद खास और पारंपरिक तरीके से मनाया गया। इसमें शाही जुलूस निकाला गया। विदाई के दौरान प्रमिला और पूर्णिमा को पारंपरिक रूप से सजाया गया और जंगल से कैंप परिसर तक एक जुलूस निकाला गया।

इस कार्यक्रम में वन कर्मचारी, महावत और संरक्षण कर्मी शामिल हुए और दोनों हाथियों को विशेष ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। वन विभाग ने घोषणा की है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी इन दोनों हाथियों को विभाग के तहत आजीवन विशेष देखभाल, भोजन और पूरी पशुचिकित्सा सहायता मिलती रहेगी।

सुरक्षा की कमान अब पांच नए ‘रक्षकों’ के हाथ

बता दें कि एक तरफ दो अनुभवी साथी रिटायर हुए हैं, वहीं मानस टाइगर रिजर्व की सुरक्षा को बरकरार रखने के लिए पांच नए हाथियों को टीम में शामिल किया गया है। इनमें मनालीसा, राजा, बुबुल, बिजोय और बीरशिंग का नाम शामिल हैं। इन पांचों युवा हाथियों ने अनुभवी महावतों और प्रशिक्षकों की देखरेख में तीन महीने का कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा किया है।

इस ट्रेनिंग के दौरान उन्हें वन विभाग के कमांड मानना, गश्त के नियम, मुश्किल मैदानी संचालन और वन कर्मचारियों के साथ तालमेल बिठाना सिखाया गया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ये नए हाथी अब अवैध शिकार विरोधी गश्त, वन्यजीवों की निगरानी और अन्य महत्वपूर्ण संरक्षण कर्तव्यों को संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

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