असम विधानसभा चुनाव में अब केवल कुछ ही दिन बचे हैं। राज्य के 126 सीटों पर एक ही चरण में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी। वहीं, चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई 2026 को समाप्त होने वाला है। चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सभी पार्टियों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
चुनावी रैलियों और जनसभाओं का दौर जारी है। इस बीच सबकी नजर जलुकबारी विधानसभा सीट पर टिकी हुई है। कारण यह कि यहां से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा मैदान में हैं। इस सीट को बीजेपी नेता का गढ़ माना जाता है। सरमा इस सीट से बीते 25 साल से विधायक हैं। 2001 के विभानसभा चुनाव में कांग्रेस में रहते हुए वो पहली बार इस सीट से विधायक बने।
हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के साथ राजनीतिक मतभेदों के बाद, सरमा ने 21 जुलाई 2014 को अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। 15 सितंबर 2015 को विधानसभा से इस्तीफा देने तक, वे जालुकबारी से विधायक थे। 23 अगस्त 2015 को सरमा नई दिल्ली में अमित शाह के आवास पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। उन्हें राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की ‘चुनाव प्रबंधन समिति’ का संयोजक नियुक्त किया गया।
जानकारी अनुसार मई 2016 में, सरमा ने लगातार चौथी बार जालुकबारी निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की और 24 मई को सोनोवाल मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। यह पूर्वोत्तर भारत में बनी पहली BJP सरकार थी। उन्हें वित्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, योजना एवं विकास, पर्यटन, पेंशन और लोक शिकायत जैसे विभाग (पोर्टफोलियो) सौंपे गए।
25 साल से जालुकबारी सीट पर कब्जा
आंकड़ों को देखें तो साल 2001 में पहली बार कांग्रेस से जीतने और उसके बाद पार्टी बदल कर बीजेपी में आने जैसे बड़े राजनीतिक फेरबदल के बाद भी हर बार के चुनाव में उनके जनाधार में बढ़ोतरी हुई है। हर बार जीत की मार्जिन बढ़ी है। हालांकि, 1996 उन्हें इसी सीट से हार का भी सामना करना पड़ा था।
साल 1996 की चुनाव में सरमा असम गण परिषद के उम्मीदवार भ्रृगु कुमार फुकान के खिलाफ मैदान में उतरे थे। लेकिन उन्हें हार मिली थी। फुकान के कुल 46,446 (54.97%) वोट मिले थे। जबकि सरमा को केवल 29,318 (34.70%) वोट। लेकिन इस चुनाव के बाद उन्होंने फिर कभी हार का मुंह नहीं देखा।
हार का अंतर: 17,128 वोट
जीत का अंतर: 10,019 वोट
जीत का अंतर: 42,468 वोट
जीत का अंतर: 77,403 वोट
जीत का अंतर: 85,935 वोट
जीत का अंतर: 1,01,911 वोट
साल 2001 के विधानसभा चुनाव में सरमा को 45,054 (46.76%) वोट मिले। जबकि उनके करीबी प्रतिद्वंद्वी एनसीपी के भ्रृगु कुमार फुकान को 35,035 (36.36%) वोट ही मिले।
साल 2006 के विधानसभा चुनाव में जीत की मार्जिन और ज्यादा बढ़ गई। इस बार सरमा को 76,948 (63.47%) वोट मिले। उनके करीबी प्रतिद्वंद्वी एजीपी की पुस्पा देका को केवल 34,480 (28.44%) वोट ही मिले थे।
साल 2011 के चुनाव जीत और ज्यादा प्रचंड हो गई। इस बार के चुनाव में सरमा को 93,812 (72.09%) वोट मिले। इस बार उनके करीबी प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के प्रद्युत बोरा को केवल 16,409 (12.61%) वोटों से संतोष करना पड़ा। जो कुल वोटों का महज 7.96% प्रतिशत था।
साल 2016 का चुनाव एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट था। इस बार वे बीजेपी से मैदान में उतरे थे। इस बार के चुनाव में उन्हें 118,390 (76.16%) वोट मिले। जबकि उनके करीबी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के निरेन देका को केवल 32,455 (20.87%) वोट ही मिले।
वहीं, 2021 के विधानसभा चुनाव में सरमा को 130,762 (77.39%) वोट मिले। जबकि उनके करीबी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के रोमेन चंद्र बोरठाकुर को महज 28,851 (17.07%) वोटों से ही संतोष करना पड़ा।
आंकड़ों को देखें तो 2006 चुनाव में उन्हें 31,894, साल 2011 के चुनाव में 16,864, साल 2016 के चुनाव में 24,578 और साल 2021 में 12,372 वोट पिछली बार की तुलना में अधिक मिले थे। इससे स्पष्ट है कि उनका जनाधार इस सीट पर लगातार मजबूत हुआ है।
अब इस बार के चुनाव में वह सातवीं बार इस सीट से मैदान में हैं। उनके सामने केवल दो महिला उम्मीदवार हैं। पहली निर्दलीय प्रत्याशी दीपिका दास और दूसरी कांग्रेस प्रत्याशी बिदिशा नियोग। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरमा एक बार फिर एकतरफा जीत हासिल करेंगे या इस बार उनका किला ध्वस्त होगा।
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शपथ का वह दिन असम की राजनीति के इतिहास में एक साधारण दिन नहीं था। सत्ता बदली थी, चेहरे बदले थे, लेकिन असली बदलाव उस व्यक्ति के भीतर था, जिसने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। जैसे ही गोलाप बोरबोरा ने शपथ ली, यह साफ होने लगा कि यह सिर्फ सरकार बदलने की घटना नहीं है, यह राजनीति के तौर-तरीकों, उसके चाल-चलन और उसके चरित्र में बदलाव की शुरुआत है। उस दौर में, जब सत्ता का मतलब बढ़ती दूरी, बढ़ता तामझाम और बढ़ती औपचारिकता होता जा रहा था, बोरबोरा ने उसी क्षण से एक अलग रास्ता चुन लिया। पूरी खबर पढ़ें...
