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रजत सेठी बने BJP के ‘प्रशांत किशोर’, साथी ने कहा- हजार करोड़ दे तब भी नहीं करूंगी कांग्रेस के लिए काम

असम विधानसभा चुनावों में रजत सेठी और शुभ्रस्‍था भाजपा के लिए 'प्रशांत किशोर' की भूमिका में रहे। उनका कहना है कि वे भाड़े पर काम करने के बजाय विचारधारा से प्रभावित राजनीतिक उद्यमी हैं।
Author May 20, 2016 13:35 pm
असम में भाजपा के रणनीतिकार रजत सेठी और शुभ्रस्‍था।

असम में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के कई नायक है। इनमें सर्वानंद सोनोवाल, हेमंत बिस्‍व सर्मा और राम माधव जैसे नाम शामिल हैं। लेकिन रजत सेठी और शुभ्रस्‍था का भी इस जीत में बड़ा योगदान है और पार्टी के नेता इस बात से वाकिफ भी हैं। सेठी ने आईआईटी खड़गपुर से बीटेक किया और इसके बाद अमेरिका में एमआर्इटी व हार्वर्ड केनेडी स्‍कूल से पढ़ाई की। वहीं शुभ्रस्‍था दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज से पासआउट हैं। वह प्रशांत किशोर के साथ भी काम कर चुकी हैं और बिहार चुनाव के समय उनके साथ थीं।

रजत सेठी जुलाई 2015 में अमेरिका से लौटे थे। दो महीने बाद उनकी मुलाकात भाजपा महासचिव राम माधव से हुई। राम माधव ने उनसे पूछा, ”असम भाजपा के लिए मुश्किल राज्‍य है। वहां जीतने की कोई गांरटी नहीं है। तूम अब भी वहां जाना चाहोगे?” 30 साल के सेठी भाजपा के साथ काम करने के लिए गुवाहाटी चले गए। उन्‍होंने बताया, ”हम जीते क्‍योंकि हमारा गठबंधन मजबूत था जिसमें कई समुदाय शामिल थे। सर्वानंद सोनोवाल की साफ छवि और हेमंत बिस्‍व सर्मा के उत्‍साह से हमें मदद मिली।” उनके साथ काम करने वाली शुभ्रस्‍था की संस्‍था सिटीजंस फॉर अकाउंटेबल गर्वनेंस ने 2014 में मोदी के लिए लोकसभा चुनावों में भी काम किया था।

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रजत और शुभ्रस्‍था ने मिलकर असम में भाजपा के प्रचार की कमान संभाली। उनका कहना है कि वे भाड़े पर काम करने के बजाय विचारधारा से प्रभावित राजनीतिक उद्यमी हैं। यही बात उन्‍हें प्रशांत किशोर से अलग करती है। सेठी ने कहा, ”मैं बाजार की ताकतों से नहीं बल्कि विचारधारा के अनुसार चलता हूं।” शुभ्रस्‍था का कहना है, ”यदि मुझे 1000 करोड़ रुपये भी ऑफर किए जाए तो भी मैं कांग्रेस के लिए काम नहीं करूंगी।” सेठी कानपुर के रहने वाले हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई आरएसएस द्वारा चलाए जाने वाले शिशु मंदिर में हुई। इसके बाद आईआईटी खड़गपुर से बी टेक किया। उन्‍होंने बताया कि वहां के अंग्रेजी बोलने और रॉक म्‍यूजिक सुनने वाले लोगों में उनका मन नहीं लगा। इसलिए उन्‍होंने कैंपस में हिंदी सेल शुरू की। अमेरिका से पढ़ाई के बाद उन्‍होंने एक आईटी कंपनी भी शुरू की जिसे बाद में बेच दिया।

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असम भाजपा के इंचार्ज राम माधव ने सेठी को 32 जिलों और 25000 बूथ पर लोगों को एकजुट करने का काम सौंपा। इसके लिए गुवाहाटी में फ्लैट किराए पर लिया गया। यहीं पर भाजपा का वार रूम बना। सेठी ने बताया, ”हमने सब कुछ सूक्ष्‍म स्‍तर पर किया। सोचिए भाजपा के पास केवल पांच विधायक थे लेकिन अमित शाह और माधव कहते रहते थे कि हम अगली सरकार बना सकते हैं।” सेठी और शुभ्रस्‍था ने असम के राजनीतिक माहौल को समझने के लिए कंप्‍यूटर और मोबाइल सॉफ्टवेयर की मदद ली। इसके बाद 400 युवाओं को तैयार किया।

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सेठी ने बताया, ” कांग्रेस ने गोधरा ट्रेन और पीडि़त कुतुबुद्दीन अंसारी की फोटो लगाकर गलती की। उसने यह दिखाना चाहा कि यह मोदी का गुजरात मॉडल है। यह पैंतरा काम नहीं आया। लोग गुजरात दंगों से नहीं जुड़े।” उन्‍होंने कहा कि एनालिसिस में सामने आया कि भाजपा और एजीपी के बीच कैमिस्‍ट्री नहीं है लेकिन अमित शाह ने गठबंधन किया। भाजपा ने कई और तरकीबें भी आजमाई। उन्‍होंने भूपेन हजारिका की कविताओं से लोगों को जोड़ा। तरुण गोगोई पर सीधे हमला नहीं बोला और हेमंत को सोनोवाल से ज्‍यादा रैलियां करने दीं। सेठी ने कहा, ”हम संभलकर कदम उठाए। सभी नए विचारों को सबसे पहले सोशल मीडिया पर लागू किया। माधव टास्‍क मास्‍टर हैं जबकि शाह मैन ऑफ डिटेल्‍स।”

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