West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए हिमंता बिस्वा सरमा ने वोटर्स को धुव्रीकृत करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी आपत्ति केवल बांग्लादेशी मुसलमानों के प्रति है। उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदू और मुसलमान दोनों बदलाव की तलाश में हैं।

बीजेपी के लिए सुरक्षित मानी जाने वाली बागडोगरा सीट पर एक जनसभा को संबोधित किया। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं कभी हिंदू-मुस्लिम नहीं कहता, केवल बांग्लादेशी मुसलमानों की बात करता हूं।”

लोग बांग्लादेशी शब्द छोड़ देते हैं- सरमा

उन्होंने कहा, “जब मैं बांग्लादेशी मुसलमानों के बारे में बात करता हूं तो कुछ लोग हमेशा बांग्लादेशी शब्द को छोड़ देते हैं और इसे हिंदू-मुस्लिम के रूप में पेश करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय मुसलमानों और हिंदुओं की भावनाओं को नजर अंदाज किया जा रहा है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने हाल ही में कूच बिहार में एक चुनावी रैली में सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ टिप्पणी करने के लिए सरमा के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।

यह कहते हुए कि राज्य में 27% मुसलमानों में से ज्यादातर बांग्लादेशी हैं, सरमा ने कहा कि टीएमसी को इसका फायदा पहले से मिलता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कांग्रेस और सीपीआई(एम) सक्रिय राजनीति में नहीं थीं। जब उनसे बीजेपी के इस आरोप के बारे में पूछा गया कि टीएमसी नेता तुष्टीकरण की राजनीति कर रही हैं, तो उन्होंने कहा, “ममता बांग्लादेशी मुसलमानों का खुलकर समर्थन करती हैं। मैं यह साफ तौर पर कह रहा हूं।”

बंगाल चुनाव का अहम मुद्दा क्या है?

जब उनसे पूछा गया कि इस चुनाव का मुख्य मुद्दा क्या है, तो सरमा ने जवाब दिया, “बंगाल, असम और बिहार में, अगले 20 सालों तक जनसांख्यिकी चुनावों का एक प्रमुख मुद्दा बनी रहेगी। आदिवासी लोग, मूल निवासी हर दिन संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें हर दिन इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। हम, दिल्ली वाले , हमें इसका खामियाजा नहीं भुगतना पड़ता।”

केंद्र द्वारा हाल ही के संसदीय सत्र में महिला आरक्षण लागू करने से संबंधित लाए गए विधेयकों की हार पर सरमा ने कहा कि विपक्ष का इस विधेयक के खिलाफ मतदान करना इसे नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने कहा, “उभरती हुई महिलाएं, युवा छात्राएं, कॉलेज जाने वाली छात्राएं, विश्वविद्यालय जाने वाली छात्राएं। विपक्ष को जवाब देना होगा कि उन्होंने विधेयकों के खिलाफ मतदान क्यों किया।”

मुख्यमंत्री उम्मीदवार के सवाल का जवाब देने से किया परहेज

सरमा ने उत्तर बंगाल में कहा कि वहां का माहौल बदलाव के संकेत दे रहा है, लेकिन उन्होंने इस सवाल का जवाब देने से परहेज किया कि अगर भाजपा राज्य में जीतती है तो मुख्यमंत्री का उम्मीदवार कौन होगा। उन्होंने कहा, “यह कोई बड़ी बात नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी एक दिन बैठकर (भाजपा अध्यक्ष) नितिन नबीन को फोन पर बता सकते हैं कि मुख्यमंत्री कौन होगा। मैं आपको बता दूं, मुख्यमंत्री कौन होगा, इस बारे में सारी बातें कांग्रेस में चर्चा का विषय हैं। भाजपा में तो इस पर चर्चा भी नहीं होती। मैं अभी असम से लौटा हूं। मैंने वहां चुनाव लड़ा, अपनी जान की बाजी लगाकर लड़ा। हो सकता है कि एक साल के भीतर मुझे बता दिया जाए कि मैं अब मुख्यमंत्री नहीं रहूंगा। कोई समस्या नहीं है। बीजेपी में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए ज्यादा जगह नहीं है।”

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने ली चुटकी

जब उनसे पूछा गया कि क्या भाजपा के हाईकमान द्वारा कहे जाने पर वे केंद्र में जाने को तैयार होंगे, तो सरमा ने चुटकी लेते हुए कहा, “अगर वे मुझे अभी घर पर बैठने दें, तो मैं ज्यादा खुश रहूंगा। यहां तक ​​कि अगर पांच साल का अंतराल भी हो, तो भी मैं ज्यादा खुश रहूंगा।” कांग्रेस से आने के बाद बीजेपी में उनकी तेजी से हुई तरक्की से बीजेपी के भीतर के लोगों की असंतुष्टि के बारे में पूछे जाने पर सरमा ने कहा, “कोई न कोई हमेशा आगे बढ़ता रहता है। दुनिया स्थिर नहीं है। कोई न कोई आगे बढ़ जाता है। ये सब सामान्य बातें हैं।”

दोनों राज्यों के सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की तुलना करते हुए बीजेपी नेता ने कहा, “आप कोलकाता के किसी भी सरकारी अस्पताल और असम के किसी भी सरकारी अस्पताल में जाइए। दोनों में स्वर्ग और नरक का अंतर है।” सरमा ने कहा कि बंगाल को शुरुआत में एक फायदा मिला था, क्योंकि कोलकाता कभी ब्रिटिश भारत की राजधानी थी। लेकिन अब राज्य के लोग काम की तलाश में गुजरात और दिल्ली पलायन कर रहे हैं और खुश नहीं हैं। असम में 9 अप्रैल को मतदान होने के बाद सरमा ने बंगाल में चुनाव प्रचार शुरू किया। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे।

वोटिंग से पहले रात में बाइक चलाने पर लगी पाबंदी

चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पूरे पश्चिम बंगाल में दोपहिया वाहनों पर कड़ी पाबंदियां लगा दी हैं। स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने बाइक रैलियों पर रोक लगा दी है। साथ ही रात के समय आवाजाही भी सीमित कर दी है। साथ ही बाइक पर पीछे बैठकर चलने को भी सीमित कर दिया गया है। ये पाबंदियां मंगलवार से लागू हो गई हैं और उन सभी 152 विधानसभाओं पर लागू रहेंगी, जहां 23 अप्रैल को पहले चरण में वोटिंग होनी है। पढ़ें पूरी खबर…