दिल्ली की साकेत कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह नोटिस कथित हेट स्पीच मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान जारी किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।
सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने साकेत कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जनवरी में असम के डिब्रूगढ़ जिले के डिगबोई में दिए गए भाषण के दौरान मिया समुदाय के वोटरों को लेकर विवादित बयान दिए थे।
याचिका में किए गए दावे
याचिका में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि चार से पांच लाख मियां वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। साथ ही लोगों से मियां समुदाय को परेशान करने की बात भी कही गई ताकि वे असम छोड़ दें। याचिका के अनुसार मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वे असम में मतदान न कर सकें। बता दें कि असम में बांग्लादेशी मुसलमानों को मियां कहा जाता है।
याचिकाकर्ता ने इन बयानों को धार्मिक और सामुदायिक वैमनस्य फैलाने वाला बताते हुए भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। इनमें समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाने, धार्मिक भावनाएं भड़काने और राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने से जुड़े आरोप शामिल हैं।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने हर्ष मंदर की शिकायत खारिज कर दी थी। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने कहा था कि कथित बयान दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में नहीं दिए गए थे और ऐसा कोई ठोस सबूत भी पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि दिल्ली में इन बयानों के कारण तनाव या हिंसा की स्थिति बनी।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने सेशन कोर्ट का रुख किया। उनके वकील ने दलील दी कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत किसी भी संज्ञेय अपराध की सूचना देश के किसी भी पुलिस स्टेशन में दी जा सकती है। इसे जीरो एफआईआर की व्यवस्था बताया गया जिसके तहत अपराध कहीं भी हुआ हो, शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
याचिका में गृह मंत्रालय की जीरो एफआईआर और ई-एफआईआर से संबंधित एसओपी का भी हवाला दिया गया है। अब साकेत कोर्ट इस मामले में 15 जुलाई को आगे सुनवाई करेगी।
