असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि जब तक वह सत्ता में हैं, मियां समुदाय के लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मियां समुदाय के लोगों को लगातार मुश्किलों का सामना करना चाहिए जिससे वे इस राज्य को छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएं।
असम में बांग्ला भाषा बोलने वाले मुसलमानों के लिए आमतौर पर मियां शब्द का प्रयोग किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मियां अवैध बांग्लादेशी हैं इसलिए उन्हें राज्य में काम करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। सरमा के बयानों को लेकर कई बार विवाद हो चुका है।
‘असम में बांग्लादेशी मियां रहते’, हिमंता बिस्वा बोले
हिमंता ने एक सरकारी कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से कहा, ”अगर मैं असम में रहा, तो उन्हें (मियां समुदाय के लोगों को) परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वे यहां शांति से नहीं रह सकते। अगर हम उनके लिए मुश्किलें खड़ी करेंगे, तभी वे यहां से जाएंगे।”
…वे यहां काम नहीं कर सकते
सरमा ने अपने पुराने बयान का भी जिक्र किया। इस बयान में उन्होंने कहा था कि अगर मियां समुदाय का कोई रिक्शा चालक पांच रुपये किराया मांगे, तो उसे चार रुपये देने चाहिए। हिमंता ने कहा, ”दरअसल, मैंने तो उनके हित में ही बात की थी। कानून के हिसाब से तो वे यहां काम नहीं कर सकते। किसी देश के नागरिक अपने देश में काम कर सकते हैं। बांग्लादेश के लोग यहां कैसे काम कर सकते हैं?”
हिमंता ने कहा, ”अगर वे मेरा उनके हित में बोलना स्वीकार नहीं कर सकते, तो मुझे उनके खिलाफ काम करना होगा।” सरमा बार-बार दावा करते रहे हैं कि अगली जनगणना में असम की कुल जनसंख्या में बांग्लादेशी मुसलमानों की संख्या 40 प्रतिशत तक हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने इस समुदाय के लोगों पर जमीन पर अतिक्रमण करने, ‘लव जिहाद’ और ‘फर्टिलाइजर जिहाद’ में शामिल होने का भी आरोप लगाया है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बोला था हमला
अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मियां मुसलमानों पर सरमा की हालिया टिप्पणियों को लेकर उन पर हमला बोला था और उन्हें मुस्लिम विरोधी और बांटने वाला बताया था। बोर्ड ने सीजेआई और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इस मामले में दखल देने का भी अनुरोध किया था।
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