असम सरकार ने 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को आधार कार्ड जारी करने पर रोक लगाने का फैसला किया है। हालांकि अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) और चाय बागान समुदाय से जुड़े लोगों को मार्च 2027 तक आधार कार्ड जारी किए जाते रहेंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद दी।
कैबिनेट बैठक की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “असम कैबिनेट ने फैसला किया है कि 18 वर्ष से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति को आधार कार्ड नहीं दिया जाएगा। हालांकि ST, SC और चाय बागान समुदाय के लोगों को मार्च 2027 तक आधार कार्ड मिलते रहेंगे।”
गुवाहाटी सैटेलाइट सिटी परियोजना को स्वीकृति
इस फैसले के अलावा राज्य सरकार ने एक बड़े शहरी विकास प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कैबिनेट ने गुवाहाटी महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) क्षेत्र के अंतर्गत गुवाहाटी सैटेलाइट सिटी परियोजना को स्वीकृति दे दी है।
इससे पहले शुक्रवार को नई दिल्ली में नीति आयोग द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों के साथ आयोजित बैठक में हिमंत बिस्वा सरमा ने “भौगोलिक समानता” पर आधारित विकास मॉडल की वकालत की थी।
उन्होंने कहा कि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सिर्फ आर्थिक विकास की गति बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि विकास का लाभ देश के हर क्षेत्र तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के विकास के पहले चरण का फोकस आर्थिक वृद्धि को तेज करने पर था, जबकि अगले चरण में विकास के अवसरों को देश के सभी क्षेत्रों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर भारत राष्ट्रीय नीति निर्माण के केंद्र में आया है। उन्होंने क्षेत्र में कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे, शांति स्थापना और एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत हुए विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पूर्वोत्तर की रणनीतिक और आर्थिक अहमियत काफी बढ़ी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इन कोशिशों ने क्षेत्र में आर्थिक विस्तार और देश के बाकी हिस्सों के साथ बेहतर एकीकरण की मजबूत नींव तैयार की है। असम के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है और मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और तकनीक जैसे कई क्षेत्रों में निवेश बढ़ रहा है।
